जेएनयू स्टूडेंट शरजील इमाम को नहीं मिली जमानत, यूएपीए के तहत 2019 में हुए थे अरेस्ट

Published : Oct 22, 2021, 03:06 PM ISTUpdated : Oct 22, 2021, 03:07 PM IST
जेएनयू स्टूडेंट शरजील इमाम को नहीं मिली जमानत, यूएपीए के तहत 2019 में हुए थे अरेस्ट

सार

जेएनयू के स्टूडेंट शरजील इमाम को 13 दिसंबर 2019 को जामिया मिलिया इस्लामिया में कथित भाषण के लिए गिरफ्तार किया गया था। 

नई दिल्ली। जेएनयू (JNU) के स्टूडेंट शरजील इमाम (Sharjeel Imam) को अभी कुछ और दिनों तक जेल में ही गुजारनी होगी। दिल्ली (Delhi) के साकेत कोर्ट (Saket Court) ने शरजील इमाम की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। शुक्रवार को कोर्ट शरजील इमाम की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रहा था। सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने कोर्ट से कहा कि शरजील इमाम पर यूएपीए के तहत राजद्रोह का केस है। पुलिस ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि शरजील इमाम ने भड़काऊ भाषणों के जरिए मुसलमानों को भड़काने की कोशिश की थी। यह भड़काऊ भाषण इमाम ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान दिए थे।

शरजील इमाम ने खारिज किया भड़काऊ भाषण देने की बात

जेएनयू के छात्र शरजील इमाम ने इस मामले में जमानत याचिका दायर करते हुए पिछली सुनवाई में कहा था कि ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है उनके भाषण से हिंसा हुई न ही उसने हिंसा के लिए किसी को उकसाया है। शरजील इमाम ने दावा किया था कि उन्होंने किसी भी विरोध या प्रदर्शन के दौरान कभी भी किसी हिंसा में भाग नहीं लिया। 

शरजील इमाम ने भाषणों के कुछ अंश पढ़े

कोर्ट में इमाम के अधिवक्ता तनवीर अहमद मीर ने अदालत में उनके भाषणों के कुछ अंश पढ़े और कहा कि वे राजद्रोह कानून के तहत नहीं आते हैं। उन्होंने कहा इस भाषणों में हिंसा का कोई मामला नहीं बनता। यह राजद्रोह की श्रेणी में कैसे है? उन्होंने कहा सड़कों को अवरुद्ध करना देशद्रोह कैसे है? 
उन्होंने कहा कि भाषणों की विषयवस्तु के अवलोकन से पता चलता है कि न तो हिंसा के लिए उकसाया गया और न ही हिंसा की कोई घटना हुई है जिसके लिए इमाम के भाषणों के लिए जिम्मेदार ठहराया जाए। 

2019 में गिरफ्तार हुए थे शरजील इमाम

जेएनयू के स्टूडेंट शरजील इमाम को 13 दिसंबर 2019 को जामिया मिलिया इस्लामिया (Jamia Milia Islamia University) में कथित भाषण के लिए गिरफ्तार किया गया था। आरोप है कि उन्होंने 16 दिसंबर को अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में भी कथित तौर पर असम और बाकी पूर्वोत्तर को भारत से काटने की धमकी दी थी। वो 28 जनवरी 2020 से न्यायिक हिरासत में है।

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