रेलवे में नौकरी के नाम पर मां-बेटे से 20 लाख की धोखाधड़ी, टेक्नीशियन पर FIR

Published : Jun 30, 2026, 09:30 AM IST
Representative Image (File Photo/ANI)

सार

रेलवे में नौकरी दिलाने के नाम पर एक टेक्नीशियन ने मां-बेटे से 20 लाख रुपये ठग लिए। सीबीआई ने आरोपी टेक्नीशियन मोगनाती किशोर कुमार के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोपी ने पीड़ितों को धोखा देने के लिए फर्जी दस्तावेज भी तैयार किए थे।

नई दिल्ली [भारत] 30 जून (एएनआई): केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने दक्षिण मध्य रेलवे के एक टेक्नीशियन और अन्य अज्ञात लोक सेवकों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। अधिकारियों ने बताया कि इन पर रेलवे में नौकरी दिलाने के बहाने एक महिला और उसके बेटे से 20 लाख रुपये की धोखाधड़ी करने का आरोप है।

विशाखापत्तनम में सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के अनुसार, मुख्य आरोपी की पहचान विजयवाड़ा डिवीजन के तहत मచిલીపట్నం में कैरिज एंड वैगन डिपो में टेक्नीशियन ग्रेड-I मोगनाती किशोर कुमार के रूप में हुई है। केंद्रीय एजेंसी ने पश्चिम गोदावरी जिले की निवासी कुनाधराजू नागा पद्मा द्वारा दर्ज की गई एक औपचारिक लिखित शिकायत और केंद्रीय रेल मंत्रालय से आधिकारिक मंजूरी मिलने के बाद जांच शुरू की। अपनी शिकायत में, नागा पद्मा ने आरोप लगाया कि वह अगस्त 2021 में एक रिश्तेदार के माध्यम से किशोर कुमार से परिचित हुई थीं। कुमार ने कथित तौर पर उन्हें रेलवे आरक्षण काउंटर पर ऑफिस स्टाफ की नौकरी और उनके बेटे अच्युत वर्मा के लिए टिकट कलेक्टर (टीसी) की नौकरी का झूठा वादा करके लालच दिया। उसने कथित तौर पर दावा किया कि वह नियुक्तियों को सुरक्षित करने के लिए विजयवाड़ा में मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) कार्यालय में अधिकारियों को मैनेज कर लेगा।

20 लाख रुपये की धोखाधड़ी

जांच के विवरण से जुड़े एक सीबीआई अधिकारी ने कहा, "2021 और नवंबर 2025 के बीच, शिकायतकर्ता ने आरोपी को कुल 20 लाख रुपये का भुगतान किया। इसमें से 12 लाख रुपये शिकायतकर्ता और उनके परिवार के सदस्यों के मोबाइल नंबरों से फोनपे के माध्यम से डिजिटल रूप से ट्रांसफर किए गए, जबकि शेष 8 लाख रुपये नकद में दिए गए।"

धोखे को बनाए रखने के लिए, आरोपी ने कथित तौर पर कई जाली चयन परीक्षा परिणाम और आधिकारिक रेलवे विभाग के दस्तावेज बनाकर पीड़ितों को दिए, ताकि उन्हें यह विश्वास हो जाए कि उन्होंने भर्ती प्रक्रिया सफलतापूर्वक पास कर ली है।

ऐसे हुआ धोखाधड़ी का खुलासा

धोखाधड़ी का खुलासा तब हुआ जब शिकायतकर्ता को लगातार हो रही देरी पर शक हुआ और उन्होंने स्वतंत्र रूप से दस्तावेजों की जांच की, जिसमें पता चला कि दस्तावेज पूरी तरह से नकली थे।

सीबीआई ने तब कार्रवाई की जब रेलवे बोर्ड ने सूचित किया कि सक्षम प्राधिकारी - रेल मंत्री - ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17A के तहत रेलवे कर्मचारी की जांच के लिए वैधानिक अनुमति दे दी है।

इन धाराओं के तहत मामला दर्ज

सीबीआई ने किशोर कुमार पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की धारा 61(2) (आपराधिक साजिश), 318 (धोखाधड़ी), और 336(3) (धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी) के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7A के तहत मामला दर्ज किया है। (एएनआई)

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