दिल्ली जल बोर्ड व एनबीसीसी के अधिकारियों के ठिकानों पर रेड, 38 करोड़ के टेंडर में इस तरह लिया लाभ

Published : Jul 09, 2022, 04:15 PM ISTUpdated : Jul 09, 2022, 04:28 PM IST
दिल्ली जल बोर्ड व एनबीसीसी के अधिकारियों के ठिकानों पर रेड, 38 करोड़ के टेंडर में इस तरह लिया लाभ

सार

सीबीआई ने प्राइवेट कंपनी को टेंडर देने के मामले में केस दर्ज करने के बाद दिल्ली जल बोर्ड और एनबीसीसी के अधिकारियों के ठिकानों पर रेड किया। केंद्रीय एजेंसी को काफी अधिक नकदी, ज्वेलरी और फिक्स डिपॉजिट के कागजात मिले हैं। 

नई दिल्ली। दिल्ली जल बोर्ड (DelhiJal Board) और एनबीसीसी (NBCC) के खिलाफ सीबीआई (CBI) ने भ्रष्टाचार का केस दर्ज किया है। सीबीआई ने इलेक्ट्रो मैग्नेटिक फ्लो मीटर्स (Electro magnetic flow meters) की सप्लाई, इंस्टालेशन, टेस्टिंग व कमिशनिंग के 38 करोड़ रुपये के कांट्रैक्ट को अपात्र कंपनी को देने के आरोप में केस दर्ज किया है। केस दर्ज करने के बाद सीबीआई ने दिल्ली-एनसीआर में दस से अधिक ठिकानों पर रेड भी किया है।

आरोपियों के ठिकानों पर सीबीआई का रेड

दिल्ली जल बोर्ड व एनबीसीसी से जुडे़ जिम्मेदारों के यहां सीबीआई ने रेड भी किया है। करीब दस जगहों पर किए गए रेड में सीबीआई को डेढ़ करोड़ रुपये के आसपास कैश, करीब सवा करोड़ रुपये की ज्वेलरी और 69 करोड़ रुपये की फिक्स डिपॉजिट के पेपर्स मिले हैं। सीबीआई अधिकारियों ने बताया कि एनबीसीसी के तत्कालीन महाप्रबंधक के आवास से संपत्ति के कई दस्तावेज भी मिले हैं। 

इनके खिलाफ हुआ है केस

एजेंसी ने दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) के पूर्व अधिकारियों के मुख्य अभियंता जगदीश कुमार अरोड़ा, अधीक्षक अभियंता पी के गुप्ता, कार्यकारी अभियंता सुशील कुमार गोयल, सहायक अभियंता अशोक शर्मा, एएओ रंजीत कुमार, तत्कालीन महाप्रबंधक एनबीसीसी डीके मित्तल और परियोजना कार्यकारी साधन कुमार के अलावा निजी कंपनी एनकेजी इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड पर मामला दर्ज किया है।

फर्जी दस्तावेजों के साथ 38 करोड़ का टेंडर पाया

सीबीआई के एक प्रवक्ता ने एक बयान में कहा कि यह आरोप लगाया गया था कि आरोपी ने उक्त निजी कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए साजिश रची थी और इसे तकनीकी रूप से योग्य बनाया था (जो अन्यथा कथित रूप से योग्य नहीं था)। 

दिल्ली जल बोर्ड के पांच साल के लिए विद्युत चुम्बकीय प्रवाह मीटर और संबंधित ओ और एम संचालन के एसआईटीसी के लिए दिसंबर, 2017 में एक निविदा जारी की गई थी। निजी कंपनी के साथ आरोपी की साजिश और एनबीसीसी द्वारा जारी झूठे प्रमाण पत्र और मनगढ़ंत बयान की वजह से आरोपी निजी कंपनी ने 38.02 करोड़ रुपये का टेंडर हासिल कर लिया।

 

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