
चेन्नई: तमिलनाडु में सनसनी फैला देने वाले लावण्या आत्महत्या मामले में सीबीआई ने बीजेपी के दावों को खारिज कर दिया है. मद्रास हाईकोर्ट को सीबीआई ने बताया है कि बच्ची की मौत जबरन धर्मांतरण के प्रयासों के कारण नहीं हुई थी. तंजावुर के सेक्रेड हार्ट स्कूल में पढ़ने वाली 17 वर्षीय लावण्या ने 2022 में आत्महत्या कर ली थी. बोर्डिंग में रहकर पढ़ाई कर रही लावण्या अपने पिता और सौतेली माँ के साथ घर शिफ्ट होने वाली थी, तभी उसकी मौत हो गई.
शुरू में परिवार ने कहा था कि स्कूल अधिकारियों द्वारा अन्य काम सौंपे जाने के कारण उसकी पढ़ाई बाधित हो रही थी, लेकिन बाद में परिवार ने आरोप लगाया कि उनकी बेटी ने धर्मांतरण के दबाव के कारण आत्महत्या की है. लावण्या के इलाज के दौरान वीएचपी ने उसके चार वीडियो जारी किए थे. इनमें से एक में लावण्या धर्मांतरण के लिए दबाव बनाने की बात कह रही थी, जिसके बाद 17 वर्षीय बच्ची की मौत बीजेपी के लिए एक राजनीतिक मुद्दा बन गई.
जस्टिस फॉर लावण्या हैशटैग राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ था. बीजेपी तमिलनाडु इकाई के अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया था, जिसे अब सीबीआई ने खारिज कर दिया है. सीबीआई ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि स्कूल में अकाउंट्स बनाने समेत कई काम लावण्या को सौंपे जाते थे, जिससे उसकी पढ़ाई प्रभावित हो रही थी और इसी वजह से उसने आत्महत्या की.
मद्रास हाईकोर्ट की मदुरई बेंच में पेश की गई रिपोर्ट में सीबीआई ने स्पष्ट किया है कि धर्मांतरण के प्रयासों को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं मिले हैं. डीएमके आईटी विंग ने इस रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि बीजेपी का एक और झूठ बेनकाब हो गया है.
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