SC ST में कोई सब कैटेगरी नहीं, संविधान के तहत ही मिलेगा आरक्षण, कैबिनेट का फैसला

Published : Aug 10, 2024, 11:36 AM IST
PM Narendra Modi

सार

सुप्रीम कोर्ट के क्रीमी लेयर सब-कैटेगरीकरण के सुझाव पर कैबिनेट ने चर्चा की और फैसला लिया कि संविधान में SC/ST आरक्षण में क्रीमी लेयर का कोई प्रावधान नहीं है। सरकार ने स्पष्ट किया कि वह संविधान द्वारा निर्धारित आरक्षण नियमों में कोई बदलाव नहीं करेगी।

नेशनल न्यूज। सुप्रीम कोर्ट की ओर से एससी एसटी कैटेगरी में क्रीमी लेयर के हिसाब से सब कैटेगरी बनाकर कोटा तय करने के फैसले पर कैबिनेट की बैठक में चर्चा की गई। इसमें यह तय किया गया कि संविधान में एससी एसटी आरक्षण में क्रीमी लेयर का कोई प्रावधान नहीं है। ऐसे में सरकार संविधान में तय आरक्षण  नियमों में कोई भी बदलाव नहीं करेगी। संविधान के मुताबिक ही आरक्षण दिया जाएगा। यह भी कहा गया कि एनडीए सरकार बाबा साहेब अंबेडकर की ओर से बनाए गए संविधान के प्रति प्रतिबद्ध और संकल्पबद्ध है। सरकार आरक्षण नियमों में बदलाव नहीं करेगी। 

सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर गरमाई राजनीति
सुप्रीम कोर्ट ने एससी एसटी कोटे में आरक्षण के लिए सब कैटेगरी बनाने के निर्णय ने देश भर में विवाद को जन्म दे दिया था। इसमें राज्यों को एससी एसटी में क्रीमी लेयर की पहचान कर गरीब और पिछड़े लोगों को आरक्षण दिए जाने की बात कही गई थी। इसके बाद से संसद से लेकर तमाम राजनीतिक दलों में बैठक कर इस पर विचार किया जा रहा था। तमाम दलों ने इस नियम का विरोध शुरू कर दिया था। एनडीए सरकार में केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान सहित एससी एसटी संगठनों ने भी फैसले पर अपना विरोध दर्ज कराया था। नेताओं का कहना था कि क्रीमी लेयर निर्धारित करना आसान नहीं। सिर्फ विवाद उत्पन्न होगा।

पढ़ें एससी/एसटी सब-कैटेगरी पर घमासान, पीएम मोदी से मिले सांसद...रखी ये मांग

पीएम मोदी से भी की थी सांसदों ने मुलाकात
एससीएसटी में सब कैटेगरी बनाने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भाजपा के कई सांसदों ने पीएम मोदी से मुलाकात की थी। पीएम ने आश्वासन दिया था कि मामले पर विचार कर उचित निर्णय लिया जाएगा। सांसदों ने पीएम को मांग से संबंधित ज्ञापन भी दिया था।

क्रीमी लेयर तय करना मुश्किल
सांसदों का कहना है कि एससी एसटी कोटे में सब कैटेगरी बनाने के लिए क्रीमी लेयर तय करना सबसे बड़ी चुनौती होगी। क्रीमी लेयर की कैटेगरी तय करने से लेकर आरक्षण से वंचित लोग भी विरोध करेंगे। इस फैसले के लिए संविधान से भी ऊपर उठकर काम करना होगा जो मुश्किल होगा। 

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