
Central Cabinet Decisions. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को केंद्रीय कैबिनेट की मीटिंग हुई जिसमें कुछ योजनाओं के विस्तार को मंजूरी मिली है। वहीं, कई नई योजनाओं को भी लांच करने पर सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है। केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने मीटिंग की जानकारी देते हुए कहा कि देश भर में करीब 10,000 नई इलेक्ट्रिक बसें चलाई जाएंगी। वहीं केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने विश्वकर्मा योजना के तहत 1 से 2 लाख रुपए के लोन पर अधिकतम 5 प्रतिशत ब्याज लगने की बात कही है।
इलेक्ट्रिक बसों की योजना पर खर्च होंगे 57,613 करोड़ रुपए
केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने बताया कि 3 लाख की आबादी वाले करीब 100 शहरों में इलेक्ट्रिक बसें चलाने की स्कीम को मंजूरी मिली है। इस प्रोजेक्ट पर करीब 57,613 करोड़ रुपए का खर्च आएगा। इसमें से 20,000 करोड़ रुपए केंद्र सरकार वहन करेगी। इस योजना में देश भर में 10 हजार इलेक्ट्रिक बसें चलाई जाएंगी। यह योजना पीपीपी मॉडल पर आधारित रहेगी और इसके साथ ही सिटी बसे भी चलाई जाएंगी। यह योजना 10 सालों के लिए इलेक्ट्रिक बसें चलाने की बात करती है।
विश्वकर्मा स्कीम को भी मिली मंजूरी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को कैबिनेट कमेटी ऑन इकॉनमिक अफेयर्स की बैठक हुई। इस मीटिंग में ही विश्वकर्मा योजना को मंजूरी दी गई है। स्कीम का नाम पीएम विश्वकर्मा होगा। प्रधानमंत्री मोदी ने 15 अगस्त को भाषण के दौरान इस योजना का ऐलान किया था। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि इस स्कीम का फायदा देश के 30 लाख कामगारों के परिवारों को मिलेगा। इस योजना की शुरूआत 13 हजार करोड़ रुपए से हो रही है और यह पांच साल की स्कीम है।
डिजिटल इंडिया का होगा विस्तार
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि डिजिटल योजना के विस्तार के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 14,903 करोड़ रुपए की मंजूरी दी है। इस प्रोजेक्ट के तहत 5.25 लाख आईटी प्रोफेशनल्स को और कुशल बनाया जाएगा। साथ ही 2.65 लाख लोगों को आईटी का प्रशिक्षण दिया जाएगा। डिजिटल इंडिया विस्तार में नेशनल सुपरकंप्यूटिंग मिशन के तहत 9 सुपर कंप्यूटर जोड़े जाएंगे। इस योजना में पहले ही 18 सुपर कंप्यूटर काम कर रहे हैं।
रेलवे के लिए 32,500 करोड़ रुपए की योजनाएं
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि रेलवे की विभिन्न परियोजनाओं के लिए केंद्रीय कैबिनट ने 32,500 करोड़ रुपए की मंजूरी दी है। इसके तहत सात मल्टी-ट्रैकिंग प्रोजेक्ट को मंजूरी दी गई है। इसके अलावा भारतीय रेलवे के मौजूदा नेटवर्क में 2,339 किलोमीटर जोड़े जाएंगे। यह योजनाएं आंध्र प्रदेश, बिहार, गुजरात, महाराष्ट्र, झारखंड, तेलंगाना, ओडिशा, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के 35 जिलों को कवर करेगी।
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