USA छोड़िए, खाड़ी देशों से भी बेहतर हालत में है भारत के मुसलमान, CPA की रिपोर्ट में 110 मुल्कों में नंबर-1 रैंक

Published : Feb 07, 2023, 08:06 AM ISTUpdated : Feb 07, 2023, 09:01 AM IST
 Centre for Policy Analysis

सार

CAA और हिजाब जैसे मामलों को लेकर कई देशों ने पूर्वाग्रहों से प्रेरित होकर भारतीय मुसलमानों की स्थिति चिंताजनक बताई थी, जबकि हकीकत इसके विपरीत है। भारत में मुसलमानों की स्थिति अमेरिका जैसे विकसित देश तो छोड़िए, मुस्लिम देशों से भी बेहतर है।

नई दिल्ली. नागरिका संशोधन अधिनियम(CAA) और हिजाब जैसे मामलों को लेकर कई देशों ने पूर्वाग्रहों से प्रेरित होकर भारतीय मुसलमानों की स्थिति चिंताजनक बताई थी, जबकि हकीकत इसके विपरीत है। भारत में मुसलमानों की स्थिति अमेरिका जैसे विकसित देश तो छोड़िए, मुस्लिम देशों से भी बेहतर है। सेंटर फॉर पॉलिसी एनालिसिस ( Centre for Policy Analysis-CPA) के ग्लोबल माइनोरिटीज पर उद्घाटन मूल्यांकन(inaugural assessmen) के अनुसार, धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए समावेशी उपायों(inclusivity measures towards religious minorities) के लिए भारत को 110 देशों में नंबर- पोजिशन पर रखा गया है।

ऑस्ट्रेलिया टुडे की एक रिपोर्ट के अनुसार,110 देशों में भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों को तवज्जो देने का उच्चतम स्तर है। यानी भारत में अल्पसंख्यकों सबसे अधिक पूछपरख है। इसके बाद दक्षिण कोरिया, जापान, पनामा और अमेरिका का स्थान है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मालदीव, अफगानिस्तान और सोमालिया सूची में सबसे नीचे हैं। यूके और यूएई क्रमशः 54वें और 61वें स्थान पर हैं।

बता दें कि सेंटर फॉर पॉलिसी एनालिसिस (CPA) एक शोध संस्थान है, जिसका मुख्यालय भारत के पटना में है। सीपीए रिपोर्ट के अनुसार, भारत की अल्पसंख्यक नीति एक ऐसे विजन पर आधारित है, जो विविधता बढ़ाने पर जोर देती है।

भारत के संविधान में संस्कृति और शिक्षा में धार्मिक अल्पसंख्यकों की उन्नति के लिए स्पेसिफिक और एक्सक्लूसिव प्रावधान हैं। रिपोर्ट के अनुसार, किसी अन्य संविधान में भाषाई और धार्मिक अल्पसंख्यकों को बढ़ावा देने के लिए कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है।

CPA रिपोर्ट इस बात पर फोकस करती है कि कैसे कई अन्य देशों के विपरीत भारत में किसी भी धार्मिक संप्रदाय पर कोई प्रतिबंध नहीं है। यानी किसी भी तरह की कोई रुकावट नहीं है।

मॉडल की समावेशिता और कई धर्मों और उनके संप्रदायों के खिलाफ भेदभाव की कमी के कारण संयुक्त राष्ट्र भारत की अल्पसंख्यक नीति को अन्य देशों के लिए एक मॉडल के रूप में उपयोग कर सकता है। हालांकि, यह अक्सर अपेक्षित परिणाम प्रदान नहीं करता है, क्योंकि CPA की रिपोर्ट के अनुसार, बहुसंख्यक और अल्पसंख्यक समुदायों के बीच, विशेष रूप से मुस्लिम समुदाय के साथ, विभिन्न प्रकार की चिंताओं को लेकर संघर्ष की कई रिपोर्टें हैं।

रिपोर्ट में भारत की अल्पसंख्यक नीति पर प्रकाश डाला गया है जिसकी समय-समय पर समीक्षा और फिर से जांच की जानी चाहिए। ऑस्ट्रेलिया टुड के अनुसार इसमें आगे कहा गया है कि यदि भारत देश को संघर्षों से मुक्त रखना चाहता है, तो उसे अल्पसंख्यकों के प्रति अपने दृष्टिकोण को तर्कसंगत बनाना होगा।

CPA द्वारा बनाई गई वैश्विक अल्पसंख्यक रिपोर्ट का उद्देश्य भी विश्व समुदाय को विभिन्न देशों में उनकी आस्था के आधार पर अल्पसंख्यकों के खिलाफ भेदभाव की व्यापकता पर शिक्षित करना है। यह शोध उन मुद्दों पर भी विचार करता है, जिनसे विभिन्न धार्मिक समूह और संप्रदाय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निपटते हैं।

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