
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने 2012 में हुए छावला गैंगरेप केस (Chhawla rape case) में सोमवार को तीनों आरोपियों को बरी कर दिया। तीनों पर 19 साल की लड़की के साथ गैंगरेप करने और उसकी हत्या करने का आरोप लगा था। दिल्ली की एक कोर्ट ने तीनों को दोषी करार देते हुए फांसी की सजा दी थी। हाईकोर्ट ने सजा को बरकरार रखा था। इसके बाद आरोपियों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी।
सीजेआई यूयू ललित, एस रविन्द्र भट्ट और बेला एम त्रिवेदी की पीठ ने मामले की सुनवाई की थी। इस मामले में कोर्ट ने 6 अप्रैल को फैसला सुरक्षित रख लिया था। दिल्ली सरकार के एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कोर्ट से मांग की थी कि तीनों की फांसी की सजा जारी रखी जाए। वहीं, बचाव पक्ष की ओर से वकील सोनिया माथुर ने कहा था कि कोर्ट दोषियों में सुधार आने की संभावना पर विचार करे।
क्या है मामला?
9 फरवरी 2012 को दिल्ली के छावला में रात को अपने ऑफिस से घर लौटने के दौरान 19 साल की एक लड़की को राहुल, रवि और विनोद नाम के तीन आरोपियों ने अगवा कर लिया था। आरोप है कि तीनों ने लड़की के साथ गैंगरेप किया और उसे यातनाएं दीं। उसे बेरहमी से पीटा गया। पीड़िता के चेहरे और आंख में तेजाब डाल दिया गया। इसके साथ ही उसके शरीर को सिगरेट और गर्म लोहे से दागा गया। इसके बाद उसकी हत्या कर दी गई। 14 फरवरी 2012 को पीड़िता की लाश हरियाणा के रेवाड़ी में मिली थी। पीड़िता छावला के कुतुब विहार में रहती थी।
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लड़की का शव मिलने के बाद पुलिस ने केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू की थी। पुलिस को चश्मदीदों से सूचना मिली थी कि लड़की को लाल रंग की इंडिका कार में अगवा किया गया था। इसके बाद पुलिस ने कार और उसके मालिक राहुल को खोज निकाला। राहुल ने पूछताछ के दौरान अपने दो साथियों रिवा और विनोद के बारे में पुलिस को जानकारी दी। तीनों आरोपियों ने पूछताछ के दौरान पुलिस के सामने अपना गुनाह कबूल लिया था।
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