
नई दिल्ली. भारत और चीन के बॉर्डर पर पिछले 9 महीने से चला आ रहा तनाव अब धीरे-धीरे कम होता जा रहा है। पैंगोंग झील से सैन्य वापसी की प्रक्रिया 10 फरवरी से शुरू हुई, जो गुरुवार तक चली। इसी बीच भारत और चीन के बीच 10वें दौर की मिलिट्री लेवल मीटिंग शनिवार-रविवार की दरमियानी रात करीब 2 बजे तक चली। करीब 16 घंटे की इस मीटिंग में गोगरा-हॉट स्प्रिंग्स और देप्सॉन्ग पर डिसएंजेमेंट पर चर्चा हुई। यह बैठक चीन के इलाके मॉल्डो में हुई। इसमें पूर्वी लद्दाख के स्प्रिंग्स, गोगरा और देप्सांग से सेनाओं के हटाने (डिसएंगेजमेंट) पर चर्चा हुई। बैठक में भारत ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि इन तीनों क्षेत्रों से सेना हटाने की प्रक्रिया तेजी से हो, ताकि तनाव दूर किया जा सके।
जानें अब तक क्या और डिसएंगजेमेंट की 7 शर्तें
11 फरवरी को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सुबह राज्यसभा और शाम को लोकसभा में बताया था कि लद्दाख में भारत और चीन की सेनाएं पीछे हट रही हैं। भारत ने दावा किया था कि उसने इस समझौते में कुछ नहीं खोया। भारत अपनी एक इंच जमीन भी चीन को नहीं देगा। ये हैं 7 शर्तें...
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भारतीय सेना ने 16 फरवरी को डिसएंगेजमेंट की फोटो और वीडियो जारी किया था। इसमें चीनी सैनिक बॉर्डर से लौटते दिखाई दे रहे थे। चीनी सेना अपने बंकर तोड़ते दिखाई दे रही थी। वहीं, टेंट, तोप और गाड़ियां भी लौटते दिखाई दे रही थीं।
बता दें कि जून, 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसा में 20 भारतीय सैनिक शहीद हो गए थे। चीन ने अपने सिर्फ 5 सैनिकों के मारे जाने की पुष्टि की है। हालांकि यह संख्या अधिक है, लेकिन चीन छुपा गया।
क्या है LAC
भारत और चीन को अलग करने वाली सीमा का नाम लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) कहते हैं। एलएसी 1993 में एक द्विपक्षीय समझौते में सामने आई थी। हालांकि इन दोनों देशों के बीच जमीनी स्थिति पर कोई ठोस समझौता नहीं हुआ था, इस वजह से दोनों देशों के बीच हमेशा तनाव रहता है। LAC एक बड़ा खाली एरिया है।
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