लोन के नाम पर लोगों को लूटने वाली चीनी कंपनियों पर ED ने कसा शिकंजा; रेजरपे, पेटीएम और कैशफ्री पर पड़ा छापा

Published : Sep 03, 2022, 05:05 PM ISTUpdated : Sep 03, 2022, 05:12 PM IST
लोन के नाम पर लोगों को लूटने वाली चीनी कंपनियों पर ED ने कसा शिकंजा; रेजरपे, पेटीएम और कैशफ्री पर पड़ा छापा

सार

ईडी ने चीनी लोन ऐप मामले में रेजरपे, पेटीएम और कैशफ्री जैसे ऑनलाइन पेमेंट गेटवे पर छापा मारा है। शुक्रवार से जांच एजेंसी तलाशी अभियान चला रही है। 17 करोड़ रुपए जब्त किए गए हैं।

नई दिल्ली। आसान लोन के नाम पर आम लोगों को लूटने वाली चीनी कंपनियों पर ईडी (Enforcement Directorate) ने शिकंजा कसा है। ईडी ने शनिवार को कहा कि वह चीनी लोन ऐप मामले में रेजरपे, पेटीएम और कैशफ्री जैसे ऑनलाइन पेमेंट गेटवे के बेंगलुरू स्थित परिसर में छापेमारी कर रहा है। छह जगहों पर शुक्रवार को छापेमारी की शुरुआत हुई। शनिवार को तलाशी अभियान जारी रहा।

छापे के दौरान मर्चेंट आईडी और चीनी व्यक्तियों द्वारा नियंत्रित संस्थाओं के बैंक खातों में रखे गए 17 करोड़ रुपए जब्त किए गए। चीनी नागरिकों के ये संस्थान जालसाजी कर भारत में काम कर रहे हैं। ये भारतीयों के जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल कर डमी निदेशक बनाते थे और आम लोगों से लोन के नाम पर पैसे की उगाही करते थे। ये संस्थान चीनी लोगों द्वारा नियंत्रित और संचालित होते हैं। 

पेमेंट गेटवे से चीनी कंपनियां कर रहीं थी अवैध कारोबार
ईडी ने बताया कि यह पता चला है कि चीनी कंपनियां पेमेंट गेटवे और बैंकों के पास विभिन्न मर्चेंट आईडी/खातों के माध्यम से अवैध कारोबार कर रही थीं। रेजोरपे प्राइवेट लिमिटेड, कैशफ्री पेमेंट्स, पेटीएम पेमेंट सर्विसेज लिमिटेड और चीनी व्यक्तियों द्वारा नियंत्रित या संचालित संस्थाओं के परिसरों को तलाशी अभियान में शामिल किया गया है।

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नकली पते से चल रही थी कंपनियां
जांच के दायरे में आने वाली कंपनियां पेमेंट गेटवे और बैंकों के पास रखे गए विभिन्न मर्चेंट आईडी या खातों के माध्यम से अपराध की आय अर्जित कर रही थीं। वे एमसीए (कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय) की वेबसाइट/पंजीकृत पते पर दिए गए पतों से भी काम नहीं कर रही हैं। उनके पते नकली हैं। ईडी ने कहा कि उसका मनी लॉन्ड्रिंग केस बेंगलुरु पुलिस साइबर क्राइम स्टेशन द्वारा "कई संस्थाओं और लोगों के खिलाफ दर्ज की गई कम से कम 18 FIR पर आधारित है। यह मोबाइल ऐप के माध्यम से लोन लेने वाले लोगों के उत्पीड़न और इसमें चीनी कंपनियों की संलिप्तता के संबंध में है। 

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