मदरसों और वैदिक स्कूलों में RTE के तहत समान पाठ्यक्रम हो, BJP नेता की याचिका पर हाईकोर्ट का केंद्र को नोटिस

Published : Feb 22, 2022, 02:58 PM ISTUpdated : Feb 22, 2022, 03:00 PM IST
मदरसों और वैदिक स्कूलों में RTE के तहत समान पाठ्यक्रम हो, BJP नेता की याचिका पर हाईकोर्ट का केंद्र को नोटिस

सार

common syllabus for madrasas and vedic schools : हाईकोर्ट में दायर इस याचिका में अश्विनी उपाध्याय ने तर्क दिया है कि आरटीई अधिनियम (RTE Act) को इस तरह से लागू किया जाना चाहिए ताकि संवैधानिक लक्ष्य केवल कानून के मृत पत्र न रह जाएं। उन्होंने कहा कि इसके सिद्धांतों को आगे बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने अदालत को बताया कि आरटीई अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार, केंद्र सरकार सभी शैक्षणिक संस्थानों के लिए एक प्रभावी और सामान्य पाठ्यक्रम तैयार करने के लिए बाध्य है।

नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने शिक्षा के अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत मदरसों और वैदिक स्कूलों के लिए समान पाठ्यक्रम की मांग वाली याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने इस मामले में केंद्रीय शिक्षा, कानून और न्याय और गृह मंत्रालय को नोटिस जारी किया है। यह याचिका भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता और सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने दायर की है।  उन्होंने तर्क दिया कि आरटीई अधिनियम की धारा 1 (4) और 1 (5) को मनमाना और असंवैधानिक घोषित किया जाना चाहिए।

2012 के RTE एक्ट की खामियां बताईं 
उपाध्याय ने कोर्ट में तर्क दिया कि 2012 के अधिनियम (RTE) में पेश किए गए दो खंडों में कहा गया है कि आरटीई अधिनियम के प्रावधान मदरसों, वैदिक पाठशालाओं और धार्मिक शिक्षा प्रदान करने वाले शैक्षणिक संस्थानों पर लागू नहीं होंगे। चीफ जस्टिस डीएन पटेल और जस्टिस ज्योति सिंह की खंडपीठ ने इस मामले में नोटिस जारी किया। कोर्ट ने केंद्र और अन्य को जवाब दाखिल करने के लिए 30 मार्च तक का समय दिया है।

यह भी पढ़ें : राज कुंद्रा पोर्नोग्राफी केस : एक्ट्रेस से जबरन पोर्न शूट करवाने वाले चार आरोपी अरेस्ट, गोवा-शिमला में छिपे थे

बच्चों को धार्मिक शिक्षा से वंचित रखने प्रावधान डाले गए
हाईकोर्ट में दायर इस याचिका में उपाध्याय ने तर्क दिया है कि आरटीई अधिनियम को इस तरह से लागू और कार्यान्वित किया जाना चाहिए ताकि संवैधानिक लक्ष्य केवल कानून के मृत पत्र न रह जाएं। उन्होंने कहा कि इसके सिद्धांतों को आगे बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने अदालत को बताया कि आरटीई अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार, केंद्र सरकार को सभी शैक्षणिक संस्थानों के लिए एक प्रभावी और सामान्य पाठ्यक्रम तैयार करना है। लेकिन, 14 साल तक के सभी बच्चों के लिए एक समान प्रणाली लागू करने के बजाय मदरसों, वैदिक पाठशालाओं और धार्मिक शिक्षा प्रदान करने वाले शैक्षणिक संस्थानों में इन प्रावधानों को लागू कर दिया गया। इससे इनमें पढ़ने वाले बच्चे बेहतर शिक्षा से वंचित हैं।  

हर बच्चे के लिए समान शिक्षा की मांग 
उपाध्याय ने याचिका में कहा कि अनिवार्य शिक्षा हर बच्चे को स्कूल जाने की अनिवार्यता तय करती है। लेकिन एक प्रभावी सामान्य पाठ्यक्रम देने में कमी करना शिक्षा न देने से भी बदतर है। एक अनिवार्य शिक्षा प्रणाली की पहचान उसका पाठ्यक्रम है, जिसे समान रूप से और समान रूप से पूरे बोर्ड में लागू किया जाना चाहिए, ताकि ऐसी स्थिति सुनिश्चित की जा सके, जिसमें प्रत्येक बच्चे को एक समान रूप से रखा जाए। 
 
यह भी पढ़ें बंगाल में म्यूनिसिपल इलेक्शन: वोटिंग से बिजनेसमैन का मर्डर, भाजपा MLA ने किया tweet-बंगाल में माफियाराज
 

PREV

National News (नेशनल न्यूज़) - Get latest India News (राष्ट्रीय समाचार) and breaking Hindi News headlines from India on Asianet News Hindi.

Recommended Stories

कौन हैं राहुल मामकूटथिल? MLA पर तीसरे रेप केस का सच क्या है?
North India Weather: सड़कें जमीं, ज़िंदगी थमी-कोहरे ने छीनी 4 जिंदगियां-कौन से राज्य हाई रिस्क पर?