
रांची. झारखंड के दुमका में 'अंकिता हत्याकांड' से साम्प्रदायिक तनाव की स्थिति पैदा हो गई है। 17 वर्षीय अंकिता की मौत से लोगों में सरकार और प्रशासन को लेकर आक्रोश है। 22 अगस्त को एकतरफा प्यार में 'पागल' शाहरुख हुसैन ने अंकिता के घर में पेट्रोल छिड़कर आग लगा दी थी। इलाज के दौरान अंकिता ने दम तोड़ दिया। सोमवार(29 अगस्त) को उसके अंतिम संस्कार में जबर्दस्त तनाव पैदा हो गया। जैसे ही रविवार की सुबह लोगों को अंकिता की मौत की खबर लगी, लोग सड़कों पर उतर आए। बाजार तब से बंद है। लोगों ने जिला प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। दुमका-भागलपुर रोड पर घंटों जाम लगा दिया। विरोध प्रदर्शन में वीएचपी, बजरंग दल, भाजपा के अलावा बड़ी संख्या में लोग शामिल हैं। तनावपूर्ण हालात के मद्देनजर क्षेत्र में धारा 144 लगा दी है।
इस मामले में सरकार ने भी लापरवाही मानी है। स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने एक मीडिया से बातचीत में स्वीकारा कि सरकार से मामले में चूक हुई है। उन्होंने घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे एक क्रूरतम मामला बताया। गुप्ता ने कहा कि पीड़िता उनकी बहन जैसी है। आरोपी को फांसी की सजा दी जानी चाहिए। सरकार हर तरह से कड़ी कार्रवाई करेगी। साथ ही उन्होंने कहा कि ऐसे संवेदनशील मामले में राजनीति नहीं होनी चाहिए।
5 दिन मौत से लड़ती रही अंकिता, आरोपी को फांसी चढ़ाने की उठी मांग
अंकिता की अंतिम यात्रा सोमवार सुबह जब जरुआडीह स्थित उसके घर से निकली, तो हजारों लोग इकट्ठा हो गए। मौके पर नजाकत को समझते हुए जिले के डिप्टी डेवलपमेंट कमिश्नर कर्ण सत्यार्थी और एसडीएम महेश्वर महतो पुलिस बल के साथ वहां मौजूद रहे। इस घटना के विरोध में विभिन्न सामाजिक संगठनों ने दुमका बंद का आह्वान किया था। इस बीच आक्रोशित लोगों ने प्रशासन और पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। वे आरोपी शाहरुख को फांसी देने की मांग कर रहे थे। बता दें कि अंकिता का 5 दिनों से रांची के रिम्स में इलाज चल रहा था, लेकिन शनिवार की देर रात उसकी मौत हो गई।
मरने से पहले अंकिता ने बताई थी घटना
बुरी तरह झुलसी अंकिता ने पुलिस के दिए बयान में कहा था कि 23 अगस्त को जब वो घर में सोई थी, तभी करीब 5 बजे पड़ोस में रहने वाले शाहरुख हुसैन ने खिड़की से पेट्रोल डालकर आग लगा दी थी। इससे वो बुरी तरह झुलस गई। परिजन उसे दुमका के फूलो झानो मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले गए। प्राथमिक इलाज के बाद उसे रिम्स रेफर कर दिया था। मौत से कुछ घंटे पहले अंकिता ने यह बयान दिया था। कमरे में अचानक आग की लपटें उठती देख वो डरकर भागी, लेकिन ऐसा नहीं कर पाई। उसने देखा कि शाहरुख हाथ में पेट्रोल की कैन लेकर भाग रहा है।
पुलिस कस्टडी में भी हंसता दिखा आरोपी
अंकिता के बयान के अनुसार, शाहरुख 10-15 दिनों से उसे परेशान कर रहा था। लोगों के अनुसार, मोहल्ले में शाहरुख की इमेज एक आवारा किस्म के लड़के के रूप में है। उसके खिलाफ पहले भी लड़कियों को परेशान करने की शिकायतें आती रही हैं। आरोपी स्कूल-ट्यूशन आते-जाते समय अंकिता को छेड़ता था। उसने किसी से अंकिता का मोबाइल नंबर जुगाड़ कर लिया था। तब से वो फालतू मैसेज और कॉल भी करने लगा था। पीड़िता ने मरने से पहले बताया कि शाहरुख ने उसका प्रपोजल नहीं मानने पर पूरे परिवार को जान से मार डालने की धमकी दी थी। यह बात अंकिता ने अपने पिता को बताई थी। वे इस मामले में बात करने वाले थे। घटना के बाद पुलिस ने आरोपी को पकड़ लिया। लेकिन उसके चेहरे पर कोई पछतावा नहीं दिखा। वो पुलिस कस्टडी में भी हंसता रहा।
DSP नूर मुस्तफा पर लगे गंभीर आरोप
12वीं की छात्रा अंकिता को जलाकर मार डालने के मामले में भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा है कि दुमका में अंकिता को जलाये जाने के मामले में वहां के डीएसपी नूर मुस्तफा ने शुरू से ही अभियुक्त शाहरुख हुसैन को बचाने का प्रयास किया। इससे पहले राज्य के स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने कहा कि सरकार इस मामले को लेकर गंभीर है। दोषी को बख्शा नहीं जाएगा. उन्होंने 2 बार कलेक्टर से बात की है। स्पीडी ट्रायल कराई जाएगी।
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