
रायपुर, छत्तीसगढ़. बीजापुर-सुकमा जिला बॉर्डर पर शनिवार(3 अप्रैल) को नक्सलियों के साथ हुई मुठभेड़ में 24 जवानों की शहादत के बाद माओवादी सरकार से बातचीत को राजी हैं। नक्सलियों की मानें, तो इस हमले में 31 पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। सुरक्षाबल जवाबी हमले में 15 से अधिक नक्सलियों के मारे जाने की बात कह रहे हैं, लेकिन माओवादी बताते हैं कि उनके 4 लोग मारे गए। नक्सलियों के कब्जे में कोबरा बटालियन का एक जवान राकेश्वर सिंह मनहार है। अब नक्सलियों ने एक खत जारी करके सरकार से बातचीत की इच्छा जताई है। साथ ही यह भी लिखा है कि वे जवानों के दुश्मन नहीं हैं। उसे रिहा कर दिया जाएगा और वो सुरक्षित है।
जानें यह भी...
नक्सलियों द्वारा चित्र में दिखाए जा रहे हथियार शहीद जवानों के होने का दावा किया जा रहा है। उनका कहना है कि ये हथियार उन्होंने लूटे हैं। इस घटना के बाद नक्सलियों के संगठन भारत की कम्युनिस्ट पार्टी(माओवादी) की दण्डकारण्य स्पेशल जोनल कमेट ने 6 अप्रैल को 2 पत्रों का लेटर जारी किया है। इसमें लिखा है कि 3 अप्रैल को बस्तर आईजी सुंदरराज पी के नेतृत्व में सुकमा-बीजापुर जिलो के गांव पर भारी हमला करने के लिए 2000 पुलिस बल आ गए थे। इस हमले की प्लानिंग अगस्त, 2020 में नई दिल्ली में अमित शाह के नेतृत्व में बनी थी। बता दें कि 3 अप्रैल को हुए हमले के बाद अमित शाह अपना चुनावी दौरा छोड़कर छत्तीसगढ़ पहुंचे थे और घटना पर विस्तार से चर्चा की थी। माना जा रहा है कि अमित शाह के निर्देश पर टॉप नक्सलियों की लिस्ट तैयार की गई है।
नक्सलियों ने यह भी कहा
नक्सलियों ने खत में लिखा कि उन्होंने मुठभेड़ के बाद जवानों के 14 हथियार और 2000 से ज्यादा कारतूस लूटे। इसमें उनके ओड़ी सन्नी, कोवासी बदरू, पदाम लखमा, माड़वी सुक्खा व नूपा सुरेश मारे गए। इनमें से नक्सली सन्नी का शव वे नहीं ले सके। नक्सलियों ने कहा कि वे बातचीत को राजी हैं, लेकिन सरकार ईमानदार नहीं है। कोंडागांव, बीजापुर, नारायणपुर में सैनिक अभियान चलाने यह बातचीत नहीं होगी।
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