60 साल के उम्र में दूल्हा बने कांग्रेस नेता मुकुल वासनिक, रविना संग शुरू की जिंदगी की नई पारी

Published : Mar 09, 2020, 12:27 PM ISTUpdated : Feb 02, 2022, 09:45 AM IST
60 साल के उम्र में दूल्हा बने कांग्रेस नेता मुकुल वासनिक, रविना संग शुरू की जिंदगी की नई पारी

सार

कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मुकुल वासनिक  60 साल की उम्र में रविना खुराना संग शादी के बंधन में बंध गए। मुकुल वासनिक की शादी की जानकारी ट्विटर के माध्यम से मिली। वासनिक 25 साल की उम्र में पहली बार लोकसभा सांसद चुने गए थे।   

नई दिल्ली. कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मुकुल वासनिक ने 60 साल की उम्र में आखिरकार अपनी शादीशुदा जिंदगी की शुरुआत कर दी है। रविवार को वासनिक अपनी दोस्त रवीना खुराना के साथ शादी के बंधन में बंध गए। सामाचार एजेंसी से बात करते हुए वासनिक के करीबी सूत्रों ने बताया कि दोनों की शादी दिल्ली के एक पांच सितारा होटल में हुई। रवीना खुराना और पूर्व केंद्रीय मंत्री वासनिक पुराने मित्र हैं। रवीना एक निजी कंपनी में बड़े पद पर कार्यरत हैं।

 

वासनिक की शादी की जानकारी कांग्रेसी नेताओं के ट्वीट से मिली। सबसे पहले राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत, कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने ट्वीट कर यह जानकारी दी और दोनों को बधाई दी। सामरोह में अशोक गहलोत और मनीष तिवारी के अलावा अहमद पटेल, अंबिका सोनी, गुलाम नबी आजाद समेत आदि नेता मौजूद रहे।

वासनिक और रवीना की शादी पर मनीष तिवारी ने लिखा, 'नए शादीशुदा जोड़े मुकुल वासनिक और रवीना खुराना को मेरी और नाजनीन (पत्नी) की तरफ से बधाई। मैं दोनों से वर्ल्ड फेस्टिवल ऑफ यूथ ऐंड स्टूडेंट्स में मिला था। यह कार्यक्रम 1984 में मॉस्को में हुआ था। दोनों के लिए बहुत खुश हूं।'

कौन हैं मुकुल वासनिक 

महाराष्ट्र के वरिष्ठ नेताओं में से एक मुकुल वासनिक के राजनीतिक जीवन की शुरुआत एनएसयूआई से हुई थी। उनके इर्द-गिर्द पहले से ही राजनीतिक माहौल था क्योंकि उनके पिता बालकृष्ण वासनिक महाराष्ट्र के दिग्गज नेताओं में से एक थे। 

उनके पिता बालकृष्ण वासनिक बुलढाना से सिर्फ 28 साल की उम्र में सांसद चुने गए थे। अपने पिता का रिकॉर्ड तोड़ते हुए वासनिक महज 25 साल की आयु में लोकसभा के सांसद चुने गए। उनके पिता तीन बार बुलढाना से सांसद रहे। पिता के बाद वासनिक ने बुलढाना की अपनी पारंपरिक सीट से 1984, 1991 और 1998 में लोकसभा चुनाव जीता था।

 

2009 में बने केंद्रीय मंत्री 

1984 से लेकर 1986 तक वह कांग्रेस की छात्र इकाई एनएसयूआई और 1988 से लेकर 1990 तक भारतीय यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रहे। 2008 में उन्हें ब्रेन हेमरेज हुआ। इसे मात देते हुए वह स्वस्थ होकर लौटे और उन्होंने 2009 में लोकसभा चुनाव लड़ा। 2009 में उन्होंने अपनी पारंपरिक सीट बुलढाना को छोड़ दिया और रामटेक से लोकसभा चुनाव जीता। उनके अनुभव को देखते हुए मनमोहन सिंह के दूसरे बतौर प्रधानमंत्री कार्यकाल में सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय का जिम्मा सौंपा गया। 

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