नागपुर में कांग्रेस की प्रेस कॉन्फ्रेंस; तिवारी ने पूछा: सावरकर के लिए भारत रत्न, गोडसे के लिए क्यों नहीं

Published : Oct 17, 2019, 08:23 AM IST
नागपुर में कांग्रेस की प्रेस कॉन्फ्रेंस; तिवारी ने पूछा: सावरकर के लिए भारत रत्न, गोडसे के लिए क्यों नहीं

सार

कांग्रेस ने हिंदुत्व विचारक वी डी सावरकर को भारत रत्न देने की भाजपा की मांग पर निशाना साधते हुए बुधवार को भगवा पार्टी से कटाक्ष करते हुए पूछा कि वह महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को यह सम्मान देने की मांग क्यों नहीं करती? भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार को महात्मा गांधी के 150वें जयंती वर्ष पर इस मुद्दे पर गंभीरता से सोचना चाहिए।

नागपुर. कांग्रेस ने हिंदुत्व विचारक वी डी सावरकर को भारत रत्न देने की भाजपा की मांग पर निशाना साधते हुए बुधवार को भगवा पार्टी से कटाक्ष करते हुए पूछा कि वह महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को यह सम्मान देने की मांग क्यों नहीं करती? कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार को महात्मा गांधी के 150वें जयंती वर्ष पर इस मुद्दे पर गंभीरता से सोचना चाहिए। मनीष ने यहां संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि सावरकर ने महात्मा गांधी हत्याकांड में कोशिश की (और बाद में रिहा भी हुए)। एक जांच आयोग ने पाया था कि सावरकर और उनके कुछ सहयोगियों को संभवतः इस साजिश के बारे में पहले से ही जानकारी थी।

भाजपा की महाराष्ट्र इकाई ने मंगलवार को विधानसभा चुनाव के लिये घोषणापत्र जारी करते हुए 19वीं सदी के समाज सुधारक ज्योतिबा फुले और उनकी पत्नी सावित्रीबाई फुले के साथ सावरकर को भी भारत रत्न देने की मांग की थी।भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने सावरकर को भारत रत्न देने की मांग पर सवाल खड़ा करने के लिये कांग्रेस पर हमला बोला था, जिसके बारे में पूछने पर तिवारी ने भाजपा पर पटलवार किया। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा, "मैं इसके जवाब में एक सवाल करना चाहूंगा- श्री सावरकर ही क्यों? श्री गोडसे क्यों नहीं, श्री सावरकर महात्मा गांधी की हत्या के एक आरोपी थे और श्री गोडसे को दोषी ठहराया गया था।"

तिवारी ने कहा, "इसलिए महात्मा गांधी के 150वें जयंती वर्ष में क्या राजग-भाजपा सरकार किसी ऐसे व्यक्ति को सम्मानित करने जा रही है, जिसने महात्मा गांधी की हत्या का प्रयास किया था... 1969 में, जब कपूर आयोग का गठन किया गया था, तो संभवतः पाया गया कि (सावरकर) और उनके कुछ अन्य सहयोगियों के पास 30 जनवरी, 1948 को हुई घटना की पहले से ही जानकारी थी। पूर्व केन्द्रीय मंत्री ने कहा, "अगर यह सब सही है तो सरकार को गंभीरता से सोचने की जरूरत है कि वे किस रास्ते पर जा रहे हैं।"

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