नौकरी का झांसा, लाखों की ठगी! बेंगलुरु में मां-बेटे के साथ हुआ धोखा

Published : Oct 21, 2024, 09:48 AM IST
नौकरी का झांसा, लाखों की ठगी! बेंगलुरु में मां-बेटे के साथ हुआ धोखा

सार

बेंगलुरु में दो बच्चों को सरकारी नौकरी का लालच देकर एक महिला से ₹47 लाख और 857 ग्राम सोना ठग लिया गया। सीएआर हेड कांस्टेबल समेत तीन आरोपी फरार।

बेंगलुरु: दो बच्चों को सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर एक महिला से ₹47 लाख और 857 ग्राम सोने के जेवरात लेकर ठगी करने के आरोप में शहर सशस्त्र रिजर्व पुलिस (सीएआर) के एक हेड कांस्टेबल समेत तीन लोगों के खिलाफ नंदिनी लेआउट पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया है। अन्नपूर्णेश्वरी नगर, श्रीगंध कॉलोनी निवासी भाग्य की शिकायत पर सीएआर हेड कांस्टेबल प्रशांत कुमार, उसकी पत्नी दीपा और डी. प्रशांत नामक व्यक्ति के खिलाफ धोखाधड़ी, विश्वासघात और जान से मारने की धमकी देने के आरोप में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

शिकायत का विवरण: भाग्य ने बताया कि उनके दोनों बच्चे सरकारी नौकरी की तलाश में थे। साल 2021 में उनके अपने ही गांव चामराजपेट के सीएआर हेड कांस्टेबल प्रशांत कुमार से मुलाकात हुई। उन्होंने बच्चों के सरकारी नौकरी की कोशिश करने की बात बताई। प्रशांत ने कहा कि वह एडीजीपी उमेश कुमार का ड्राइवर है और कई सरकारी अधिकारियों और केपीएससी अधिकारियों से उसकी जान पहचान है। उसने तीन महीने के अंदर सीधी भर्ती के जरिए बेटी को एसडीए और बेटे को एफडीए की नौकरी दिलाने का वादा किया। उसकी पत्नी दीपा ने भी नौकरी दिलाने का आश्वासन दिया। एसडीए पद के लिए ₹15 लाख और एफडीए पद के लिए ₹25 लाख मांगे गए। एडवांस के तौर पर ₹5.50 लाख लिए गए।

कई किश्तों में ₹47 लाख ट्रांसफर: इस बीच, प्रशांत कुमार ने अतिरिक्त मुख्य सचिव मंजूनाथ प्रसाद के निजी सहायक के रूप में डी. प्रशांत नाम के एक व्यक्ति से भाग्य का परिचय कराया। डी. प्रशांत ने कहा कि जल्दी पैसा देने पर जल्दी काम हो जाएगा। भाग्य ने अपने पति के नाम पर कर्ज लेकर ₹10 लाख आरोपियों को दिए। बाद में, आरोपियों ने नकद और बैंक ट्रांसफर के जरिए कुल ₹47 लाख ले लिए।

नकली चयन सूची: आरोपियों ने 12 जून 2020 को भाग्य के बेटे को सिंचाई विभाग में और बेटी को किसी अन्य विभाग में क्रमशः एसडीए और एफडीए पद पर नियुक्ति का दावा किया। उन्होंने केपीएससी की दूसरी अतिरिक्त चयन सूची की एक कॉपी दी, जिसमें दोनों के नाम होने का दावा किया गया। बाद में ₹5 लाख और मांगने पर भाग्य को शक हुआ और उन्होंने दस्तावेजों की जांच की तो वे नकली निकले।

जान से मारने की धमकी: जब भाग्य ने सवाल किया, तो आरोपियों ने ₹58 लाख का चेक दिया जो बाउंस हो गया। दोबारा पूछने पर उन्होंने गाली-गलौज की और पैसे या नौकरी देने से इनकार कर दिया।

सिर्फ 58 ग्राम सोना वापस: आरोपियों को पता चला कि भाग्य ने शहर के एक बैंक में 915 ग्राम सोने के जेवरात गिरवी रखे हैं। उन्होंने ₹25 लाख देकर जेवरात छुड़ा लिए और भाग्य को सिर्फ 58 ग्राम सोना लौटाया। बाकी 857 ग्राम सोना अपने पास रख लिया।

आरोपी कांस्टेबल निलंबित: धोखाधड़ी का मामला दर्ज होने के बाद तीनों आरोपी फरार हो गए। आरोपी सीएआर हेड कांस्टेबल प्रशांत कुमार को निलंबित कर दिया गया है और विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं। प्रशांत कुमार पर पहले भी सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर कई लोगों से लाखों रुपये की ठगी करने के आरोप लग चुके हैं।

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