
कलपेट्टा: वायनाड उपचुनाव में यूडीएफ उम्मीदवार प्रियंका गांधी के प्रचार में मुस्लिम लीग का झंडा इस्तेमाल होगा या नहीं, इसको लेकर कार्यकर्ताओं में उत्सुकता है। पिछले चुनाव में राहुल गांधी के प्रचार के लिए पार्टी के झंडों की जगह सिर्फ उम्मीदवार की तस्वीर का इस्तेमाल किया गया था। मुस्लिम लीग का झंडा हटाने की रणनीति थी, यही कहकर तत्कालीन उम्मीदवार अनिराजा और वामपंथियों ने इसकी आलोचना की थी। उत्तर भारत में भाजपा के प्रचार को रोकने के लिए एक चाल के तौर पर राजनीतिक केरल ने इसका मूल्यांकन किया था।
कल शाम को वायनाड की यूडीएफ उम्मीदवार प्रियंका गांधी निर्वाचन क्षेत्र में पहुंच रही हैं। राहुल गांधी और सोनिया गांधी भी प्रियंका के साथ निर्वाचन क्षेत्र में आएंगे। परसों प्रियंका गांधी का रोड शो होगा। इसमें लीग का झंडा इस्तेमाल होगा या नहीं, इस पर चर्चा हो रही है। हालांकि, इस बार सभी दलों के झंडे इस्तेमाल करने पर सहमति है। पिछले चुनाव में उत्तर भारत में भी आम चुनाव होने वाले थे। लीग का झंडा इस्तेमाल करने से यह अन्य तरह के प्रचार का कारण बन सकता है, यही पिछली बार की चिंता थी। इसलिए इसे हटाने का फैसला लिया गया था। मुस्लिम लीग के हरे झंडे की तुलना पाकिस्तान के झंडे से की जा रही थी, यही संकट था। लेकिन इस बार कांग्रेस या लीग के सामने ऐसी कोई समस्या नहीं है और झंडे का इस्तेमाल किया जा सकता है।
झंडा हटाने पर हमेशा कार्यकर्ताओं की ओर से विरोध होता रहा है। मुस्लिम लीग की ओर से भी इसकी आलोचना होती है। पिछले दिनों बथेरी में हुए यूडीएफ सम्मेलन में मुस्लिम लीग नेता पीके बशीर ने झंडा इस्तेमाल न कर पाने पर कांग्रेस नेताओं के खिलाफ नाराजगी जताई थी। परसों होने वाली प्रियंका की रैली में अगर झंडा इस्तेमाल नहीं किया गया तो दूसरे राजनीतिक दल इसे मुद्दा बनाएंगे, यह तय है।
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