एक देश-एक चुनाव: विधेयकों को जीवित रखने के लिए अगले 24 घंटे में जेपीसी जरूरी

Published : Dec 17, 2024, 10:38 PM ISTUpdated : Dec 17, 2024, 11:53 PM IST
Opposition walkout from Lok Sabha

सार

लोकसभा में 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' विधेयक पेश हुआ, लेकिन दो-तिहाई बहुमत न होने पर जेपीसी को भेजा गया। क्या है जेपीसी और इसका भविष्य, जानें यहाँ।

One Nation One Election: लोकसभा में संविधान 129वां संशोधन बिल मंगलवार को पेश किया गया। हालांकि, दो-तिहाई बहुमत के अभाव में सत्ताधारी बीजेपी इसे पास नहीं करा सकी। कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने दो विधेयकों को पेश करते हुए उसे जेपीसी में भेजने की बात कही। संविधान (129वां) संशोधन विधेयक सरकार इसलिए लाने पर विचार कर रही ताकि लोकसभा और विधानसभा चुनावों के अलावा पंचायत और निकाय चुनाव भी एक साथ कराए जा सके। इन सबके लिए संविधान में संशोधन की आवश्यकता है। हालांकि, सदन में दो-तिहाई बहुमत नहीं होने पर सरकार ने इसे जेपीसी में भेजने का फैसला किया है। जेपीसी में अधिकतम 31 सांसद शामिल हेंगे।

मंगलवार दोपहर कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने लोकसभा में विधेयक पेश किया। विधेयक को लेकर काफी देर तक तीखी बहस हुई। इसके बाद वोटिंग कराया गया। विधेयक के पक्ष में 269 और विपक्ष में 198 वोट पड़े। दो-तिहाई बहुमत नहीं होने पर विधेयक पास नहीं हो सकता। अब विधेयकों को JPC के पास भेज दिया गया।

'एक राष्ट्र, एक चुनाव' विधेयक JPC का गठन

वन नेशन-वन इलेक्शन के लिए गठित होने वाली जेपीसी को लेकर लोकसभा स्पीकर ओम बिरला फैसला देंगे। संसद की सहमति पर जेपीसी सदस्यों के नामों को तय किया जाएगा। यह अगले दो दिनों में पूरा कर लिया जाएगा। जेपीसी में अधिकतम 31 सदस्य होंगे। इसमें लोकसभा के अलावा राज्यसभा के भी सदस्य होंगे।

20 दिसंबर के पहले गठित करनी होगी जेपीसी

संसद के शीतकालीन सत्र का समापन 20 दिसंबर शुक्रवार को होना है। ऐसे में इस सत्र में पेश हुए विधेयक को अगर पास नहीं कराया गया या उसे किसी समिति को नहीं सौंपा गया तो विधेयक स्वत: समाप्त हो जाएगा। इसे फिर से अगले सत्र में पेश करना होगा। ऐसे में जेपीसी का गठन अगले दो दिनों में किया जाना अनिवार्य है। संसदीय सूत्रों के अनुसार, संसद में राजनीतिक दलों से जेपीसी के लिए सांसदों के नाम प्रस्तावित करने को कहा गया है। जेपीसी की मियाद 90 दिन की होगी। इसके बाद संसद की सहमति पर ही इसका कार्यकाल बढ़ाया जा सकता है। 

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