चुनाव में ड्यूटी के बाद पॉजिटिव हुई, मां मुझसे संक्रमित हो गईं; हर पल उनकी ही चिंता सता रही थी

Published : May 31, 2021, 07:10 AM IST
चुनाव में ड्यूटी के बाद पॉजिटिव हुई, मां मुझसे संक्रमित हो गईं; हर पल उनकी ही चिंता सता रही थी

सार

भारत कोरोना की दूसरी लहर का सामना कर रहा है। देश में अब भी हर रोज 3500 से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा रहे हैं। हालांकि, एक्टिव केस लगातार कम हो रहे हैं। इसके अलावा रिकवरी रेट भी 90% के ऊपर पहुंच गया है। यानी हर 100 लोगों पर 90 आसानी से ठीक हो रहे हैं। ऐसे में समाज में कोरोना को लेकर फैले डर को दूर करने के लिए Asianet Hindi लगातार ऐसे लोगों से बात कर उनकी कहानी अपने पाठकों के सामने ला रहा है, जिन्होंने कोरोना को मात दी और समाज के लिए मिसाल पेश की।

लखनऊ. कोरोना की दूसरी लहर ने सबको बुरी तरह डरा दिया था। यह अप्रैल से मई के मध्य तक तो जैसे जिंदगी पर मौत भारी पड़ती दिखाई दे रही थी। लेकिन कहते हैं कि जीवन हमेशा चलता रहता है। जो हौसला रखता है, वो मुसीबत को भी पार कर लेता है। इस बीमारी को हराने वाले इसी हौसलों की कहानी हैं। देश में अब भी हर रोज 3500 से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा रहे हैं। हालांकि, एक्टिव केस लगातार कम हो रहे हैं। इसके अलावा रिकवरी रेट भी 90% के ऊपर पहुंच गया है। यानी हर 100 लोगों पर 90 आसानी से ठीक हो रहे हैं। ऐसे में समाज में कोरोना को लेकर फैले डर को दूर करने के लिए Asianet Hindi लगातार ऐसे लोगों से बात कर उनकी कहानी अपने पाठकों के सामने ला रहा है, जिन्होंने कोरोना को मात दी और समाज के लिए मिसाल पेश की।

Asianetnews Hindi के लिए अमिताभ बुधौलिया ने उत्तर प्रदेश के जालौन में रहने वालीं कोरोना विनर स्नेह भदौरिया से बात की, जिन्होंने बताया कि कैसे वे संक्रमित हुईं और उनके संपर्क में आने के बाद उनकी मां भी पॉजिटिव हुईं और दोनों ने कैसे कोरोना को मात दी...

चुनाव को लेकर पहले ही डर का माहौल था, ऐसे में ड्यूटी पर जाने से पहले ही डरी थी
मैं एक शिक्षक हूं। कोरोना महामारी की दूसरी लहर के बीच अन्य सरकारी कर्मचारियों की तरह मेरी ड्यूटी भी चुनाव में लगी थी। यह चुनाव का चौथा चरण था। तीन चरण हो चुके थे। इन चरणों में ड्यूटी पर गए कई कर्मचारी संक्रमित हुए थे। इनमें से सैकड़ों अपनी जान गंवा चुके थे। खुद के संक्रमित होने का डर भी था। इन सबके बावजूद मैंने बिना सोचे अपना फर्ज निभाकर लोकतंत्र में सहभागिता दिखाने का फैसला किया।

ड्यूटी से आने के बाद लक्षण थे, मां को भी बुखार था
ड्यूटी से आने के बाद मुझे बुखार और जुकाम हो गया। वहीं, मेरे संपर्क में आने के बाद मां को भी बुखार आने लगा। दूसरे दिन अचानक सांस लेने में दिक्कत हुई, तो तुरंत डॉक्टर के पास गए। डॉक्टर ने जांच कराने की सलाह दी। जांच कराई तो मां और मेरी रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई। इसके बाद प्रशासन ने दवाओं के साथ घर में होम आइसोलेट कराया। पापा में भी लक्षण थे। लेकिन उनकी रिपोर्ट निगेटिव आई। हालांकि, घर के बाकी सदस्यों में लक्षण नहीं थे, इसमें भाई के दो छोटे बच्चे भी शामिल थे। इस दौरान सबसे ज्यादा चिंता उन्हीं की सता रही थी। क्योंकि जांच से पहले वे बच्चे मेरे और मां के संपर्क में थे। हालांकि, उन्हें अब तक कोई लक्षण नहीं था।

मां मेरे संपर्क में आने के बाद संक्रमित हो गईं; हर पल उनकी ही चिंता सता रही थी
मेरी और मां की रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद बस यही लग रहा था कि मेरी मां, जिनकी उम्र 58 साल है, मेरे संपर्क में आने के बाद संक्रमित हुई थीं। ऐसे में उन्हीं की चिंता और डर हर पल सता रहा था। उनमें लक्षण भी मुझसे ज्यादा थे।

तीसरे दिन स्वाद चला गया, उसी वक्त डॉ के के अग्रवाल का वीडियो सुना, तो आई हिम्मत
डॉ. केके अग्रवाल अब तो दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनका वीडियो देखकर मुझे काफी हिम्मत आई। दरअसल, ऑक्सीजन लेवल ठीक होने के बाद मुझे दवाएं देकर होम आइसोलेट किया गया। इस दौरान बंद कमरे में सिर्फ मोबाइल ही सहारा रह गया था। कोरोना से जुड़ीं अच्छी बुरी खबरें भी सुनती थी। रिश्तेदारों और जानने वालों की कोरोना से मौत की खबरें भी आ जाती थीं। ऐसे में हिम्मत जवाब देने लगती थी। लेकिन तभी एक वीडियो डॉ. केके अग्रवाल का देखा। उसमें वे बता रहे थे, कैसे लक्षण बढ़ते हैं, कौन से लक्षण होने खतरनाक है। उन्होंने इस वीडियो में बताया था कि जिस मरीज को खाने में स्वाद नहीं मिलता, ऐसे स्ट्रेन के शत प्रतिशत मरीज ठीक हो रहे हैं। ऐसे में मुझे हिम्मत आई कि मेरा स्ट्रेन ज्यादा खतरनाक नहीं है।

हर दिन डॉक्टरों के संपर्क में थी
होम आइसोलेशन के दौरान हर दिन डॉक्टर के संपर्क में थे। दवाइयों से लेकर खाने तक उन्होंने जो कुछ बताया, उसी का पालन किया। ऑक्सीजन स्तर भी लगातार चेक कर रहे थे। यह बिल्कुल ठीक था। चौथे-पांचवें दिन तक बाकी लक्षण भी काफी कम रह गए थे। ऐसे में उम्मीद जग गई थी कि अब अस्पताल की जरूरत नहीं पड़ेगी और घर पर रहकर ठीक हुआ जा सकता है।

कोरोना अदृश्य दुश्मन, लेकिन हिम्मत और सही समय पर इलाज से हराया जा सकता है
कोरोना एक अदृश्य दुश्मन है। इसका सामना भारत ही नहीं, अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस ब्राजील जैसी महाशक्तियां भी कर रही हैं। लेकिन ऐसा भी नहीं है कि इसे हराया नहीं जा सकता हो। 14 दिन के होम आइसोलेशन में यह बात समझ आ गई कि अगर हम सही समय पर इलाज लेंगे। यह पहले दिन ही विश्वास करेंगे कि हमारी खांसी, जुकाम और बुखार भी कोरोना हो सकता है, तो आप आसानी से कोरोना पर जीत हासिल कर सकते हैं। लेकिन हमें यह याद रखना है कि अगर हमारी रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद हम निगेटिव हो गए, तो निश्चित ही कोरोना हम पर हावी हो जाएगा। इसलिए कोरोना की रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद हमें भी सकारात्मक रहना है। अगर हम ऐसा करने में सफल हो गए, तो दवाएं और दुआएं दोनों आपके इलाज में असर करने लगेंगी। 

Asianet News का विनम्र अनुरोधः आइए साथ मिलकर कोरोना को हराएं, जिंदगी को जिताएं...। जब भी घर से बाहर निकलें माॅस्क जरूर पहनें, हाथों को सैनिटाइज करते रहें, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें। वैक्सीन लगवाएं। हमसब मिलकर कोरोना के खिलाफ जंग जीतेंगे और कोविड चेन को तोड़ेंगे। #ANCares #IndiaFightsCorona

 

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