
मुंबई. भारत में चल रहे दुनिया के सबसे बड़े कोरोना वैक्सीनेशन को लेकर राजनीति बंद नहीं हो रही है। महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ ने वैक्सीन की कमी की शिकायत की थी। लेकिन महाराष्ट्र सरकार के सहयोगी NCP प्रमुख शरद पवार से असलियत बयां कर दी। उन्होंने कहा है कि केंद्र कोरोना महामारी के इस कठिन समय में राज्य सरकार के साथ सहयोग कर रही है। हम सभी को एकजुट होकर इस खतरे से लड़ना होगा। राज्य और केंद्र दोनों को साथ आना होगा और महामारी से लड़ने का तरीका खोजना होगा। पवार के बयान के बाद भाजपा नेता प्रीति गांधी ने उद्धव ठाकरे पर बेवजह चिल्लाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की सरकार चिल्लाकर केंद्र पर दोहरा चरित्र अपनाने का आरोप लगा रही है। जबकि उनके वरिष्ठ नेता शरद पवार ने कहा कि केंद्र कोरोना महामारी से निपटने के लिए पूरी तरह सहयोग कर रही है।
महाराष्ट्र के हेल्थ मिनिस्टर बोले
इस संबंध में महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने कहा-केंद्र सरकार द्वारा वैक्सीन को लेकर जारी किए गए नए आदेश के अनुसार महाराष्ट्र को केवल 7.5 लाख वैक्सीन दी गई हैं। जबकि उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, हरियाणा आदि को महाराष्ट्र की तुलना में कहीं अधिक वैक्सीन दी गई हैं। मैंने और शरद पवार ने वैक्सीन को लेकर भेदभाव किए जाने के मु्द्दे पर डॉ.हर्षवर्धन से बात की है। हमारे पास सबसे अधिक संख्या में सक्रिय मरीज़, पॉजिटिविटि रेट है तो हमें इतनी कम वैक्सीन क्यों दी जाती हैं? उन्होंने मुझे आश्वासन दिया कि इसमें जल्द ही सुधार होगा।
जानिए क्या है मामला...
वैक्सीन की कमी की शिकायत करने पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ सरकार की खिंचाई कर दी थी। पंजाब और दिल्ली सरकार वैक्सीनेशन कराने में नाकाम साबित हो रही हैं। डॉ. हर्षवर्धन ने महाराष्ट्र सरकार के आरोपों पर कहा था कि देश में कहीं भी वैक्सीन की कमी नहीं है। महाराष्ट्र सरकार बार-बार अपनी ही गलतियों को दोहरा रही है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने दो टूक कहा था कि गलतियों के कारण ही महाराष्ट्र में हालात खराब हुए। वो अपनी नाकामी छुपाने केंद्र सरकार पर आरोप लगा रही है। स्वास्थ्य मंत्री के मुताबिक, महाराष्ट्र में केवल 86% हेल्थ वर्कर्स को कोरोना वैक्सीन की पहली डोज दी गई। दिल्ली में में 72% और पंजाब में केवल 64% स्वास्थ्यकर्मियों को वैक्सीन लगाई गई। जबकि 10 अन्य राज्य और केंद्र शासित राज्यों में 90% से ज्यादा स्वास्थ्यकर्मियों को वैक्सीन लगाई जा चुकी है। यानी फ्रंट लाइन वर्कर्स को वैक्सीन लगाने में ये सरकारें फेल हैं।
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