
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने सोमवार को कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों के इलाज के लिए संशोधित गाइडलाइंस जारी की। इसमें दवाओं, उसके उपयोग और इलाज की पद्धतियों को लेकर दिशानिर्देश दिया गया है। कहा गया है कि एंटी इंफ्लामेटरी या इमम्युनोमोड्यूलेटरी उपचार पद्धतियों यथा स्टोराइड के साथ यह भी जोखिम जुड़ा रहता है कि जब इन्हें बहुत पहले दे दिया जाए या अधिक खुराक दी जाए अथवा आवश्यकता से अधिक खुराक दी जाए तो इनसे द्वितीय संक्रमण हो सकता है।
संशोधित दिशानिर्देश अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR)-कोविड-19 राष्ट्रीय कार्यबल एवं केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के तहत संयुक्त निगरानी समूह (डीजीएचएस) ने जारी किए हैं। दिशानिर्देशों में कहा गया है कि इंजेक्शन मेथेपरेडनिसोलोन 0.5 से 01 एमजी:केजी की दो विभाजित खुराकों में या इसके जैसी डेक्सामीथासोन की खुराक पांच से दस दिनों तक मामूली हालात वाले मामलों में दी जा सकती है। इसी दवा की 01 से 02 एमजी:केजी की दो विभाजित खुराकों को इसी अवधि के लिए गंभीर मामलों में दिया जा सकता है।
गाइडलाइंस में ब्यूडेसोनाइड के 'इनहेलेशन' का भी सुझाव दिया गया है। यह दवा उन मामलों में दी जा सकती है जब रोग होने के पांच दिन बाद भी बुखार और खांसी बनी रहती है। यदि दो-तीन सप्ताह बाद भी खांसी बनी रहती है तो रोगी की तपेदिक की जांच कराने की सलाह दी गई है।
दी गई रेमडेसिवर के उपयोग की अनुमति
संशोधित दिशानिर्देशों में रोगियों में मामूली से लेकर गंभीर लक्षण होने पर रेमडेसिवर के आपातकालीन या 'ऑफ लेबल' उपयोग की अनुमति दी गई है। इसका उपयोग केवल उन्हीं रोगियों पर किया जा सकता है जिनको कोई भी लक्षण होने के 10 दिन के भीतर 'रेनल' या 'हेप्टिक डिस्फंक्शन' की शिकायत न हुई हो। आगाह किया गया है कि जो रोगी ऑक्सीजन कृत्रिम तरीके से नहीं ले रहे हैं या घर में हैं, उन पर इस दवा का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए।
संशोधित दिशानिर्देशों के अनुसार, रोग से बुरी तरह प्रभावित होने और विशेष रूप से रोग की गंभीरता या आईसीयू में भर्ती होने के 24 से 48 घंटे के बीच रोगी को आपात उपयोग या 'ऑफ लेबल' उपयोग के लिए टोसिलीजुमाब दवा दी जा सकती है।
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