
गुरुग्राम. पुलिस अधिकारी और वकील बनकर सोहना के एक शख्स से दो लोगों ने 22,000 रुपये से अधिक की ठगी कर ली। यह घटना जुलाई में हुई थी और शिकायत उसी दिन ऑनलाइन दर्ज की गई थी, लेकिन 4 महीने बाद साउथ साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में fir दर्ज की गई। सोहना निवासी सुभाष चंद द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, 1 जुलाई को एक व्यक्ति ने खुद को पालम विहार पुलिस स्टेशन के एसएचओ विक्रम के रूप में बताया। उसने पीड़िता का धमकाया कि उसके खिलाफ FIR दर्ज की गई है, क्योंकि उसने ईएमआई नहीं भरी है।
शख्स ने बताया-"मुझे संदेह हुआ, इसलिए मैंने सोहना स्टेशन से एक जानने वाले पुलिस अधिकारी को फोन किया। हालांकि उन्होंने पुष्टि की कि विक्रम नाम के यहां एक पुलिस अधिकारी हैं। जब संतुष्ट हुआ, तो मैंने उसे फिर से फोन किया और पूछा कि क्या करना है? ठग ने मुझे एक वकील का नंबर दिया। मैंने उस वकील रजत गुप्ता को फोन किया। गुप्ता ने मुझे राशि का भुगतान करने के लिए कहा और मैंने दो लेनदेन में 13,890 रुपये और 8,840 रुपये ट्रांसफर कर दिए। लेकिन भुगतान के बाद मुझे शक हुआ कि मैं ठगा गया हूं,तब मैंने शिकायत दर्ज कराई।" पुलिस से अब आईपीसी की धारा 406 (आपराधिक विश्वासघात), 420 (धोखाधड़ी) के तहत FIR दर्ज की है। आगे पढ़िए 2 अन्य अपराध..
पुणे. पुणे में पब्थ्क सेक्टर के एक बैंक की तिजोड़ी से गैर कानूनी तौर पर कथित रूप से दो करोड़ रुपये निकालने के आरोप में एक डिप्टी बैंक मैनेजन को गिरफ्तार किया गया है। पुणे ग्रामीण पुलिस ने मामले में दो अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया है। तीनों के खिलाफ आईपीसी की धारा 408 (क्लर्क या नौकर द्वारा विश्वास का आपराधिक उल्लंघन), 420 (धोखाधड़ी) और अन्य संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
क्राइम ब्रांच के अधिकारियों ने शुक्रवार शाम को एक कार को रोका और तीन लोगों- अमोल कंचर, संतोष वैजनाथ और सुशील रावले को दो बैग में 2 करोड़ रुपये नकद के साथ पाया। जांच में खुलासा हुआ कि तीन आरोपियों में से एक रावले मंचर में बैंक के करेंसी चेस्ट(तिजोड़ी) में डिप्टी मैनेजर के तौर पर काम करता है और उसने अपने पद का गलत इस्तेमाल करते हुए अनाधिकृत तरीके से 2 करोड़ रुपये निकाल लिए।
जम्मू. जम्मू-कश्मीर के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) दिलबाग सिंह ने कहा है कि पब्लिक सेफ्टी और सिक्योरिटी बढ़ाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन्स, सीसीटीवी, रोबोटिक्स और अन्य मार्डन टेक्नोलॉजिकल टूल्स का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। उन्होंने पुलिस मुख्यालय में सीनियर आफिसर्स की एक बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें पुलिस द्वारा उपयोग की जा रही तकनीकों की समीक्षा की गई। कुशल पुलिसिंग के लिए भविष्य की तकनीकों की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
DGP ने कहा-"आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन्स, सीसीटीवी, रोबोटिक्स और अन्य मार्डन टेक्नोलॉजिकल टूल्स के लोगों की सेफ्टी और सिक्योरिटी के लिए उपयोग करने की आवश्यकता है। हमें पुलिस कर्मियों की क्षमता और क्षमता बढ़ाने के लिए उपयोग की जा सकने वाली मेनपॉवर और टेक्नोलॉजी की पहचान करने की आवश्यकता है।"
उन्होंने कहा कि दुनिया भर के पुलिस बल कुशल पुलिसिंग के लिए कई आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर रहे हैं और बचाव और अन्य कार्यों के मामले में ह्यूमन इंटेरक्शन को कम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिक उपकरण प्रणाली में पारदर्शिता लाते हैं और विभिन्न मोर्चों पर पुलिसिंग की गुणवत्ता में सुधार करते हैं।
डीजीपी ने अधिकारियों को उन क्षेत्रों की पहचान करने का निर्देश दिया जहां अधिक से अधिक टेक्नोलॉजी का उपयोग किया जा सकता है। इन क्षेत्रों में टेक्नोलॉजी को प्रजेंट करने के लिए कार्य योजना तैयार करने के लिए भी निर्देश दिए।
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