
मुंबई। चक्रवात बिपरजॉय (Cyclone Biparjoy) गुजरात और महाराष्ट्र के तट की ओर बढ़ रहा है। इसके 15 जून को तट से टकराने की संभावना है। इससे पहले महाराष्ट्र में बारिश और तेज हवा चली है। मुंबई में भारी बारिश हुई है तेज हवा के चलते कई पेड़ उखड़ गए हैं। खराब मौसम के चलते विमानों की उड़ानें प्रभावित हुईं हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चक्रवात बिपरजॉय को लेकर समीक्षा बैठक की है। बैठक में गृह मंत्री अमित शाह, गुजरात के गृह मंत्री हर्ष सिंह और मौसम विभाग व आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारी भी मौजूद थे। पीएम ने राहत और बचाव अभियान के लिए कैसी तैयारी है इसकी जानकारी ली है। इससे पहले मुंबई समेत महाराष्ट्र के कई हिस्सों में रविवार शाम को बारिश हुई। मुंबई में चक्रवात के चलते समुद्र अशांत है। ऊंची-ऊंची लहरें आ रही हैं। महाराष्ट्र के अन्य तटीय हिस्सों में भी तेज हवाएं चलीं। मुंबई में तेज हवा के चलते कई पेड़ उखड़े गए हैं।
9 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से तट की ओर बढ़ रहा चक्रवात
स्काईमेट वेदर ने सोमवार को बताया, "महाराष्ट्र और गुजरात के तटों पर तेज हवाएं चल सकती हैं। गुजरात और महाराष्ट्र तट के साथ समुद्र में ऊंची लहरें उठ सकती हैं। गंभीर चक्रवात बिपरजॉय अब अत्यंत गंभीर चक्रवाती तूफान में बदल गया है। यह 9 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से तट की ओर बढ़ रहा है।"
स्काईमेट वेदर ने बताया कि 11 जून को सुबह 5:30 बजे चक्रवात मुंबई से 580 किलोमीटर पश्चिम दक्षिण पश्चिम में था। यह पोरबंदर से 480 किलोमीटर दक्षिण-दक्षिण पश्चिम, द्वारका से 530 किलोमीटर दक्षिण-दक्षिण पश्चिम और पाकिस्तान के कराची से 780 किलोमीटर उत्तर में था।
मुंबई में उड़ान संचालन बाधित
चक्रवात के चलते मुंबई एयरपोर्ट पर उड़ाने प्रभावित हुईं हैं। यात्रियों को अपनी उड़ान के लिए घंटों इंतजार करना पड़ा है। इसके चलते एयरपोर्ट पर अफरा-तफरी की स्थिति दिखी। खराब मौसम को देखते हुए कई एयरलाइनों ने अपनी उड़ानें रद्द कर दीं हैं।
गुजरात और पाकिस्तान के तटों पर दस्तक दे सकता है चक्रवात बिपरजॉय
गौरतलब है कि चक्रवात बिपरजॉय के गुरुवार को गुजरात और पाकिस्तान के तटों पर दस्तक देने की उम्मीद है। मौसम विभाग के अधिकारियों ने कहा कि 13 से 15 जून के बीच चक्रवात बेहद तेज होगा। इस दौरान तेज हवा चलेगी। इसकी रफ्तार 150 किलोमीटर प्रतिघंटा तक पहुंच सकती है। चक्रवात से गुजरात के कच्छ, जामनगर, मोरबी, गिर, देवभूमि द्वारका और पोरबंदर जिलों के प्रभावित होने की अत्यधिक संभावना है।
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