गैस चेंबर बनी दिल्ली का हाल बेहाल, सांस लेना मुश्किल, जमीन पर उतर न सके विमान

Published : Nov 13, 2024, 12:52 PM ISTUpdated : Nov 13, 2024, 01:08 PM IST
Delhi Air Pollution

सार

दिल्ली में घने कोहरे ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। दृश्यता कम होने से कई उड़ानें प्रभावित हुईं और इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर विमानों को डायवर्ट करना पड़ा। AQI भी खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है।

नई दिल्ली। वायु प्रदूषण बहुत अधिक बढ़ जाने से दिल्ली गैस चेंबर जैसी बन गई है। बुधवार सुबह धुंध की मोटी परत छा गई। कम दूरी तक दिखाई देने के चलते विमान जमीन पर उतर नहीं सके। इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर लैंड करने आ रही कई फ्लाइट को डायवर्ट करना पड़ा।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार सुबह करीब 5.30 बजे बहुत घना कोहरा छाना शुरू हुआ था। इससे पूरे शहर में दृश्यता कम हो गई। AQI (Air Quality Index) मंगलवार शाम को 316 था। बुधवार सुबह यह 370 तक गिर गया। राजधानी क्षेत्र के कई इलाकों में AQI 300 से ज्यादा दर्ज किया गया।

बुधवार को आया नगर, आनंद विहार और दिल्ली विश्वविद्यालय क्षेत्र में AQI 400 से अधिक दर्ज की गई। एक्यूआई आनंद विहार में 396, जहांगीरपुरी में 389, आईटीओ में 378 और आईजीआई हवाईअड्डा में 368 दर्ज किया गया।

400 मीटर तक पहुंच गई दृश्यता

दिल्ली में बुधवार सुबह घना धुंध छाने से दृश्यता बहुत कम हो गई। दोपहर तक इसमें सुधार हुआ। सफदरजंग जैसे इलाकों में दृश्यता 400 मीटर तक पहुंच गई। पंजाब और हरियाणा के कुछ हिस्सों में दोपहर तक दृश्यता कम रहने की संभावना है। दिल्ली में लोग दिन के समय कारों की लाइट जलाकर सफर करते नजर आए।

दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट ने धुंध को लेकर एडवाइजरी जारी की है। इसमें कहा गया, "कैट III मानकों का खड़ा नहीं उतरने वाली फ्लाइट कोहरे के कारण प्रभावित होंगी। दिल्ली हवाई अड्डे पर लैंडिंग और टेक-ऑफ जारी है। यात्रियों से अनुरोध है कि वे फ्लाइट की अपडेट स्थिति जानने के लिए संबंधित एयरलाइन से संपर्क में रहें। किसी भी असुविधा के लिए हमें गहरा खेद है।"

क्यों दिल्ली में छाया घना धुंध?

दिल्ली में धुंध छाने का प्रमुख कारण वातावरण में घनी मात्रा में धुएं की मौजूदगी है। यह धुआं, धूल के कणों के साथ मिलकर पानी के वाष्प के लिए नाभिकीयकरण (वाष्प के रूप में मौजूद पानी के फिर से छोटी-छोटी बूंद बनने की प्रक्रिया) स्थल के रूप में काम करता है। इससे पानी की छोटी बूंद बनती हैं। यह प्रक्रिया क्षेत्र में कोहरे को तेजी से घना होने देती है। इससे दृश्यता में भारी कमी आती है, खासकर जमीनी स्तर पर।

यह भी पढ़ें- घने धुंध-कोहरे की चादर में ढंकी दिल्ली, AQI 15 दिन से बेहद खराब लेवल पर

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