
दिल्ली में कूड़ों का ढेर। दिल्ली के गाजीपुर लैंडफिल में बीते दिन रविवार (21 अप्रैल) की शाम को आग लग गई थी। इसके बाद से दमकल की गाड़ियां आग बुझाने का काम कर रही थी और आखिरकार आग बुझाने में कामयाबी हासिल हुई। लेकिन इसके वजह से स्थानीय लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। हालात ऐसे थे कि जहरीले धुएं की वजह से स्थानीय निवासियों ने सांस लेने में दिक्कत होने की शिकायत की। इसको लेकर लोगों ने नेताओं को कोसा। लेकिन बात यहीं पर खत्म नहीं होती है। दिल्ली सिर्फ गाजीपुर लैंडफिल से परेशान नहीं है, बल्कि शहर में ऐसे 2 और कूड़े का पहाड़ है, जो शहरवासियों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है।
दिल्ली में गाजीपुर, भलस्वा और ओखला लैंडफिल साइट मौजूद है। इनको हटाने के लिए बीते साल दो-दो एजेंसियां ने काम का ठेका लिया था, लेकिन अब तक वैसे नतीजे नहीं निकल पाए, जिसकी लोगों को उम्मीद थी। एक रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में हर दिन 12 हजार टन कचरा निकलता है। वहीं दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) की एक रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में हर साल करीब 317 टन कचरा बढ़ रहा है। आज से 3 साल पहले तक दिल्ली में हर दिन 978 टन कचरा पैदा होता था, जो 2022 में ये आंकड़ा 11,295 टन हो गया। हालांकि, इसमें से मात्र 7 से 8 टन कचरा ही संसाधित हो पाती है।
गाजीपुर लैंडफिल की आग ने मचाई तबाही
गाजीपुर लैंडफिल में लगी आग की वजह से कूड़े के ढेर का एक हिस्सा टूट गई। इसकी वजह से लैंडफिल से सटी टिन पैनल से बनी दीवार भी गिर गई। लैंडफिल के पास स्थित घड़ोली गांव के राम कुमार कहते हैं- आग लगे हुए 15 घंटे हो गए हैं। यह धुआं कोई आम धुआं नहीं है, यह बहुत जहरीला है। हम जलन के कारण अपनी आंखें खुली नहीं रख पा रहे हैं और सांस लेने में कठिनाई हो रही है। कई लोगों ने आग की वजह से बच्चों को स्कूल तक नहीं भेजा।
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