
दिल्ली. बाहरी दिल्ली के नांगलोई में दिल्ली सरकार की एक स्कूली छात्रा क्लासरूम का पंखा उसके सिर पर गिरने से घायल हो गई। यह मामला ऐसा समय में सामने आया है, जब अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स और यूएई के अखबार खलीज टाइम्स में पिछले दिनों दिल्ली के सरकारी स्कूलों की तारीफ में छपे लेख का मुद्दा गर्माया हुआ है। AAP सरकार इसे अपनी उपलब्धि बता रही है, जबकि भाजपा इसे पेड न्यूज(पैसे देकर) बताती आ रही है। यही, नहीं दिल्ली सरकार पर शिक्षा में घोटाले का भी आरोप लगता आ रहा है।
इस मामले में मनोज तिवारी और शहजाद पूनावाला ने दिल्ली में पार्टी मुख्यालय में एक ज्वाइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस की। मनोज तिवारी ने कहा कि दिल्ली के एक स्कूल में छत का पंखा एक लड़की पर गिर गया और बच्ची गंभीर है। कई स्कूलों की हालत खराब है। रिपोर्ट के अनुसार, एक कक्षा जो 5 लाख रुपये में बन सकती थी, 33 लाख रुपये में बनाई गई थी। यहां तक कि शौचालयों को भी कक्षाओं के रूप में गिना जाता था। यह दिल्ली सरकार द्वारा भ्रष्टाचार का एक स्पष्ट मामला है।
छत पर नमी होने से टपक गया पंखा
घटना शनिवार की है। घायल छात्रा को नांगलोई के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। घटना के बारे में बताते हुए छात्रा ने आरोप लगाया कि छत में नमी थी और वह टपक रही थी। "27 अगस्त को कक्षा में पंखा छत से गिर गया, जब कक्षाएं चल रही थीं। छत में नमी थी और उसमें से पानी टपक रहा था, जिससे छत टूट गई और पंखा नीचे गिर गया। घटना के बारे में स्कूल अधिकारियों या सरकार की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
सरकारी स्कूलों में क्लासरूम के निर्माण पर जवाब
दिल्ली के उपराज्यपाल कार्यालय ने सोमवार(29 अगस्त) को चीफ सेक्रेट्री को लेटर लिखकर दिल्ली के सरकारी स्कूलों में एजुकेशन पर बजट में वृद्धि के बावजूद 2014-15 से नामांकन में गिरावट और बच्चों की उपस्थिति कम होने को लेकर जवाब मांगा है। यह पत्र उपराज्यपाल वीके सक्सेना द्वारा दिल्ली के सरकारी स्कूलों में क्लासरूम्स के निर्माण पर सीवीसी की रिपोर्ट पर 'आप' सरकार की ओर से कार्रवाई में देरी पर सवाल उठाने के कुछ दिनों बाद लिखा गया है।
लेटर में कहा गया कि दिल्ली सरकार के आर्थिक सर्वेक्षण 2021-2022 के अनुसार,2014-15 में शिक्षा पर खर्च 6,145 करोड़ रुपये से बढ़कर 2019-20 में 11,081 करोड़ रुपए किया गया, फिर भी छात्रों के नामांकन में गिरावट और छात्रों की अनुपस्थिति बढ़ी है। प्रति छात्र प्रति वर्ष खर्च 2015-16 में 42,806 रुपए से बढ़कर 2019-20 में 66,593 रुपये किया गया। इसके विपरीत नामांकित छात्रों की संख्या 2014-15 में 15.42 लाख से घटकर 2019-20 में 15.19 लाख रह गई।
भाजपा लगाती आ रही है शिक्षा घोटाले का आरोप
भाजपा लंबे समय ये आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party) की सरकार पर शिक्षा के क्षेत्र में घोटाले का आरोप लगाती आ रही है। दिल्ली बीजेपी प्रमुख आदर्श गुप्ता और प्रवक्ता ने 29 अगस्त को आरोप लगाया कि आप शिक्षा के क्षेत्र में सरकार के दावे झूठे पेश करती है। बीजेपी का आरोप है कि केजरीवाल सरकार ने टॉयलेट को भी क्लासरूम बता दिया है। भाजपा का आरोप है कि आप सरकर ने 500 स्कूल बनवाने का वादा किया था। ये तो बने नहीं, बल्कि16 स्कूल बंद हो गए। सीवीसी की रिपोर्ट के हवाले से आरोप लगाया कि स्कूलों में 2400 कमरों की जरूरत थी, लेकिन उन्हें बढ़ाकर 7180 किया गया। इनकी लागत बढ़ा दी, ताकि मुनाफखोरी हो सके।
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