
नई दिल्ली। दिल्ली के लाल किला विस्फोट केस में बड़ा अपडेट सामने आया है। सुरक्षा एजेंसियों ने मुख्य आरोपी डॉ. उमर नबी के पुलवामा स्थित घर सुरक्षा एजेंसियों ने IED धमाके से ध्वस्त कर दिया है। यह कार्रवाई सिर्फ एक घर गिराने तक सीमित नहीं, बल्कि भारत का स्पष्ट संदेश है कि आतंकवाद पर अब “ज़ीरो टॉलरेंस” की नीति लागू है। क्या इस घर से विस्फोट की कोई नई कड़ी मिलेगी? क्या यह सिर्फ एक कानूनी कार्रवाई है या किसी बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश?
डॉ. उमर नबी को दिल्ली के लाल किले के पास हुई कार बम ब्लास्ट साजिश का मुख्य चेहरा माना जा रहा है। जांच एजेंसियों का दावा है कि धमाका सिर्फ एक साधारण हिंसक घटना नहीं था, बल्कि एक बड़े आतंकी नेटवर्क की संकेतक साजिश थी, जिसके तार कश्मीर से लेकर दिल्ली और अंतरराष्ट्रीय लिंक तक जुड़े हो सकते हैं। इस बीच पुलवामा में उसके घर ढहाने की कार्रवाई ने इलाके में तनाव के साथ-साथ कई सवाल भी खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि उमर नबी काफी समय से घर पर नहीं रहता था, जबकि प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि घर आतंकी गतिविधियों से जुड़े लोगों के उपयोग में लाया जा रहा था। इसी कारण इसे ध्वस्त करना जरूरी था। आतंकवाद के खिलाफ भारत की यह कड़ी कार्रवाई इस बात का संकेत है कि अब किसी भी संदिग्ध को उसके ‘सेफ स्पॉट’ में छिपने की इजाज़त नहीं दी जाएगी।
जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि डॉ. उमर ने धमाके से पहले किन-किन लोगों से संपर्क किया, किस-किस जगह गया, और आखिर लाल किले जैसे हाई-सिक्योरिटी ज़ोन को निशाना बनाने का मकसद क्या था। इस मामले में कई डिजिटल डिवाइस और संदिग्ध दस्तावेज़ भी जब्त किए गए हैं, जिनसे बड़े खुलासे होने की उम्मीद है। पुलवामा में घर ढहाने को आतंकवाद के खिलाफ भारत के "ज़ीरो टॉलरेंस" संदेश के रूप में देखा जा रहा है। यह वही इलाका है जहां पहले भी कई आतंकी गतिविधियां देखी गई हैं।
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