
नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी की नेता आतिशी मार्लेना, अब दिल्ली की नई मुख्यमंत्री होंगी। दिल्ली में स्कूली शिक्षा को सुधारने में महत्वपूर्ण योगदान देने वाली आतिशी की शासन शैली काफी बेहतरीन मानी जाती है। एजुकेशन के फील्ड में अपना बेस्ट दे चुकी आतिशी बतौर मुख्यमंत्री कैसी साबित होंगी यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा लेकिन अपनी पुरानी कार्यशैली वह अपनाती हैं तो निसंदेह सरकार के आलोचकों को जवाब देने में सफल होंगी।
आतिशी की 5 वर्किंग स्टाइल...
फोकस्ड डेवलपमेंट पॉलिसी
दिल्ली में एजुकेशनल रिफार्म के दौरान आतिशी ने 'हैप्पीनेस करिकुलम' और 'एंटरप्रेन्योरशिप माइंडसेट करिकुलम' जैसी इनिशिएटिव्स पर फोकस किया था। उन्होंने इससे स्टूडेंट्स के इमोशनल वेल-विइंग पर ध्यान देने के साथ उनके स्किल डेवलपमेंट पर जोर दिया। अगर उन्होंने बतौर मुख्यमंत्री यही शासन शैली अपनाया तो यह बेहतर रिजल्ट दे सकता। क्योंकि ऐसी पॉलिसी केवल आर्थिक मीट्रिक के बजाय समग्र सामाजिक कल्याण को बढ़ावा देने वाली नीतियों को प्राथमिकता देता है।
डेटा ड्रिवेन डिसीजन लेना
आतिशी मार्लेना का एजुकेशनल रिफार्म के दौरान डेटा बेस्ड डिसीजन लेती रही हैं। डेटा और साक्ष्य आधारित नीतियों पर उन्होंने पूरा फोकस रखा था। बतौर सीएम आतिशी, विभिन्न क्षेत्रों में समान कार्यप्रणाली को लागू कर सकती हैं तो यह निसंदेह दिल्ली के लिए काफी लाभकारी होने के साथ आम आदमी पार्टी की लोकप्रियता में इजाफा करने में सक्षम होगा।
नौकरशाही के साथ समन्वय
शिक्षा के क्षेत्र में व्यापक सुधार करने के लिए आतिशी ने नौकरशाही का भरपूर सदुपयोग किया। शिक्षा अधिकारियों व अन्य संबंधितों के साथ एक भरोसेमंद तालमेल ने उनको सफल भी किया। दिल्ली में प्रभावी शासन के लिए अगर वह इस फार्मूले को लागू करती हैं तो इससे विभिन्न कार्ययोजनाओं को गति मिलेगी और पीपुल्स फ्रेंडली इकोसिस्टम भी स्थापित होगा।
सबको साथ लेकर विकास
आतिशी ने शिक्षा सुधार में हाशिए पर पड़े समुदायों को सशक्त बनाने का भी प्रयास शामिल था। मुख्यमंत्री के रूप में वह वंचित समूहों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर अगर नीतियों को लागू करती हैं तो वंचित समाज भी मुख्यधारा में आ सकेगा। सभी वर्गों को ध्यान में रखकर उनकी नीतियां काफी प्रभावशाली शासक के रूप में स्थापित करने में सहयोगी साबित होगी।
स्टेकहोल्डर्स के साथ जुड़ाव
मुख्यमंत्री बनने जा रहीं आतिशी ने शिक्षा सुधार के दौरान सभी स्टेक होल्डर्स के साथ कनेक्ट रहने का प्रयास किया। वह स्कूल प्रबंधन कमेटी पर जोर देती रहीं, अभिभावकों व शिक्षों के साथ जुड़कर उनसे उनके अनुभव जानने की कोशिश करती रहीं। आतिशी ने एक सहभागी शासन शैली अपनायी जिससे शिक्षा क्षेत्र से जुड़े सभी स्टेकहोल्डर्स ने अपने अनुभव साझा किए और उनके अनुसार सुधार कर एक बेहतर एजुकेशनल सिस्टम बना। अगर दिल्ली के सभी विभागों में इस सिस्टम को अपनाया गया तो यह भी उनके लिए एक बेहतर शैली साबित होगी।
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