
नई दिल्ली। दिल्ली दंगों को लेकर दिल्ली की एक अदालत में सुनवाई में दलीलें सुनी जा चुकी हैं । कोर्ट जेएनयू स्टूडेंट शरजील इमाम की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही है। जेएनयू छात्र शरजील इमाम पर दंगा भड़काने का आरोप है। कई महीनों से पेंडिंग जमानत पर सुनवाई के लिए कोर्ट सुनवाई कर रहा है। मंगलवार को उत्तर पूर्वी दिल्ली हिंसा के मामले में दिल्ली की अदालत ने विशेष लोक अभियोजक और बचाव पक्ष के वकील की दलील सुनने के बाद शरजील इमाम की जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया।
जेएनयू छात्र शरजील इमाम के वकील ने सोमवार को दिल्ली की एक अदालत को बताया कि पूर्वोत्तर दिल्ली दंगों के संबंध में सात महीने से यूएपीए मामले में उनकी जमानत याचिका को लंबित रखना कोई न्याय नहीं है।
कोर्ट कर रहा है लगातार सुनवाई
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत के समक्ष इमाम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता तनवीर अहमद मीर ने अपना पक्ष रखा। कोर्ट इस मामले में लगातार सुनवाई कर रहा है। विशेष लोक अभियोजक अमित प्रसाद ने दिल्ली दंगों में कई आरोपी व्यक्तियों की जमानत याचिका में साजिश पर तर्क दिया कि दंगों के पीछे कुछ छिपे हुए तत्व और कुछ सामने दिख रहे तत्व थे। उन्होंने कहा कि चार्ज शीट के अनुसार छिपे हुए तत्व JeIH, PFI और IU थे। कोर्ट ने एसपीपी को लिखित दलीलें दाखिल करने और दूसरे पक्ष को भी उपलब्ध कराने को कहा है। अब कोर्ट 15 फरवरी को दलीलें सुन सकता है।
दूसरे पक्ष से भी दलीलें...
अधिवक्ता तनवीर अहमद मीर SharjeelImam के लिए अपनी दलीलें देते हुए कहा कि पुलिस के खिलाफ हिंसा कहां से आ रही है? उन्होंने कहा कि विडंबना यह है कि उमर खालिद अमरावती में भाषण देते हैं और पूर्वोत्तर दिल्ली में दंगे होते हैं। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुना। अदालत ने अभी अपना फैसला सुरक्षित रखा है।
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