
नई दिल्ली. दिल्ली के उत्तर पूर्वी इलाके में फैली हिंसा को लेकर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान बेंच ने भाजपा नेता कपिल मिश्रा का वीडियो चलाया। जस्टिस मुरालीधर ने कहा, दिल्ली में स्थिति काफी दुखद है। हमने कई नेताओं के वीडियो देखे, वे लगातार नफरत वाले भाषण दे रहे हैं। यह सभी चैनलों में चल रहा है। जिसके बाद कोर्ट ने सुनवाई 2.30 बजे तक के लिए स्थगित कर दी थी। दोबारा सुनवाई करते हुए कोर्ट ने दिल्ली सरकार, पुलिस पर सख्त टिप्पणी करते हुए चेतावनी भी दी है।
क्या कहा कोर्ट ने ?
- हाई कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि दिल्ली में दूसरे '1984' को नहीं होने देंगे। 1984 में सिख दंगा हुआ था, जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए थे।
- दिल्ली हिंसा पर हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी पर केंद्र सरकार के वकील सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि डीसीपी गंभीर रूप से घायल हो गए हैं, एक कांस्टेबल की जान भी जा चुकी है। पुलिस अधिकारी के सिर में चोट लगी है और वह वेंटिलेटर पर है।
- इस पर दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि जल्द से जल्द संवैधानिक पदाधिकारियों को क्षेत्र का दौरा करना चाहिए। आपको आश्वस्त होना चाहिए कि आप कहीं भी रहें आप सुरक्षित रहेंगे। दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार से दंगा पीड़ितों को मुआवजा सुनिश्चित करने के लिए भी कहा।
- दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि हम अभी भी 1984 के पीड़ितों के मुआवजे के मामलों से निपट रहे हैं, ऐसा दोबारा नहीं होना चाहिए। नौकरशाही में जाने के बजाय लोगों की मदद होनी चाहिए। इस माहौल में यह बहुत ही नाजुक काम है, लेकिन अब संवाद को विनम्रता के साथ बनाये रखा जाना चाहिए।
याचिका में भाजपा नेताओं पर एफआईआर दर्ज कराने की मांग
दिल्ली हाईकोर्ट में एक सामाजिक कार्यकर्ता ने याचिका दाखिल की है। इसमें हिंसा की जांच के लिए SIT गठन करने की मांग की गई है। साथ ही भड़काऊ भाषण देने के लिए भाजपा नेताओं कपिल मिश्रा, अनुराग ठाकुर , प्रवेश साहिब सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।
आर्मी तैनात की जाए
साथ ही याचिका में हिंसा में मारे गए, घायलों के लिए मुआवजा, सीसीटीवी फुटेज को संरक्षित रखने, महिलाओं बच्चों को सुरक्षा सुनिश्चित करने और आर्मी तैनात किए जाने की मांग की गई है।
हाईकोर्ट में रात को हुई सुनवाई
दिल्ली हाईकोर्ट के जजों ने दो दिन से जारी हिंसा पर रात में भी सुनवाई की। यह सुनवाई एक जज के घर पर ही हुई। कोर्ट ने पुलिस को हालात काबू में करने और घायलों को उचित इलाज की व्यवस्था कराने का आदेश दिया।
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