5 टर्निंग प्वाइंट्स में समझिए, कैसे 30 दिनों में महाराष्ट्र में बनी भाजपा की सरकार

Published : Nov 23, 2019, 06:57 PM ISTUpdated : Nov 23, 2019, 07:28 PM IST
5 टर्निंग प्वाइंट्स में समझिए, कैसे 30 दिनों में महाराष्ट्र में बनी भाजपा की सरकार

सार

महाराष्ट्र में 30 दिनों से चल रहे सियासी ड्रामे में शनिवार की सुबह बड़ा बदलाव दिखा। सुबह-सुबह खबर आई कि देवेंद्र फड़णवीस ने सीएम पद की शपथ ली और एनसीपी नेता अजित पवार डिप्टी सीएम बने हैं। 30 नवंबर तक बहुमत साबित करना है। लेकिन शपथ ग्रहण के बाद भी सियासी ड्रामा थमा नहीं है। 

मुंबई. महाराष्ट्र में 30 दिनों से चल रहे सियासी ड्रामे में शनिवार की सुबह बड़ा बदलाव दिखा। सुबह-सुबह खबर आई कि देवेंद्र फड़णवीस ने सीएम पद की शपथ ली और एनसीपी नेता अजित पवार डिप्टी सीएम बने हैं। 30 नवंबर तक बहुमत साबित करना है। लेकिन शपथ ग्रहण के बाद भी सियासी ड्रामा थमा नहीं है। भाजपा की सरकार गिराने और बहुमत साबित न हो, इसके लिए तीनों दल (शिवसेना, एनसीपी, कांग्रेस) पूरी कोशिश कर रहे हैं। मीटिंग का दौर जारी है। ऐसे में बताते हैं चुनाव परिणाम और उसके बाद की वो 5 तारीखें, जो महाराष्ट्र की सियासत में टर्निंग प्वाइंट साबित हुईं।

1- टर्निंग प्वाइंट  (किसी को बहुमत नहीं) 
21 अक्टूबर को राज्य की 288 सीटों पर हुए चुनाव का 24 अक्टूबर को नतीजा आया। भाजपा-शिवसेना गठबंधन को 161 सीटें मिलीं। नतीजों के बाद पहली बार शिवसेना नेता संजय राउत ने 50-50 का जिक्र किया। शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे नतीजों के बाद मीडिया के सामने आए और कहा कि पार्टी 50-50 फॉर्मूले पर नहीं झुकेगी। इस दौरान जब उनसे आदित्य ठाकरे के मुख्यमंत्री बनने को लेकर पूछा गया तो उन्होंने पत्रकारों से कहा कि आपके मुंह में घी शक्कर। 
 
2- टर्निंग प्वाइंट (50-50 फॉर्मूले पर भाजपा और शिवसेना में ठनी)
25 अक्टूबर को महाराष्ट्र में आदित्य ठाकरे को भावी मुख्यमंत्री बताने वाले पोस्टर लगे। 27 अक्टूबर को शिवसेना ने सामना में लिखा, शिवसेना ने इस बार कम सीटें जीती हैं। 2014 की 63 के मुकाबले 56 सीटें जीती हैं, लेकिन उसके पास सत्ता की चाबी है। 29 अक्टूबर को फडणवीस ने कहा, "लोकसभा चुनाव से पहले जब गठबंधन को अंतिम रूप दिया गया था तब शिवसेना से ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री पद का वादा नहीं किया गया था।" उन्होंने कहा, मैं और पांच साल के लिए मुख्यमंत्री रहूंगा।"

3- टर्निंग प्वाइंट (देवेंद्र फडणवीस का सीएम पद से इस्तीफा, राष्ट्रपति शासन लगा)
8 नवंबर भाजपा-शिवसेना ने एक दूसरे पर आरोप लगाए। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को अपना इस्तीफा सौंपा। इसी दौरान शिवसेना नेता संजय राउत ने एनसीपी प्रमुख शरद पवार से मुलाकात की। देवेंद्र फडणवीस ने अमित शाह का हवाला देकर 2.5 साल के सीएम की बात होने से इनकार किया, जनता को पता है कौन झूठ बोल रहा। हमने हमेशा लोगों की आवाज उठाई है।

4- टर्निंग प्वाइंट (सोनिया गांधी और फिर पवार की नरेद्र मोदी से मुलाकात)
20 नवंबर को शरद पवार ने पीएम मोदी से मुलाकात की। मुलाकात के बाद कयास लगाए जाने लगे कि इस मुलाकात के बाद महाराष्ट्र में सरकार गठन पर कोई बड़ी खबर आ सकती है।  पीएम मोदी से मुलाकात से दो दिन पहले शरद पवार ने 18 नवंबर को कांग्रेस की अतंरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की। लगभग 50 मिनट तक मुलाकात हुई। 10 जनपथ में हुई मुलाकात के बाद जब शरद पवार ने कहा कि मुलाकात में महाराष्ट्र सरकार गठन पर कोई बात नहीं हुई तो पवार की इस बात ने लोगों को चौंकाया। राजनीति के जानकारों ने कयास लगाए कि शायद ही कांग्रेस शिवसेना को सपोर्ट करे। यही से बात बिगड़ने के कयास लगने लगे।

5- टर्निंग प्वाइंट (शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस की 2 घंटे तक मुलाकात, नहीं बनीं "स्पष्ट बात")
22 नवंबर को शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस की 2 घंटे तक मुलाकात हुई, लेकिन स्पष्ट बात नहीं हुई। पहली बार शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस के बड़े नेताओं की मुंबई में मुलाकात हुई। बैठक में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे, शिव सेना चीफ उद्धव ठाकरे और एनसीपी नेता शरद पवार और अजीत पवार एक साथ बैठक हुई। इसके अलावा कांग्रेस नेता अहमद पटेल और कांग्रेस महासचिव के. सी वेणुगोपाल भी बैठक में मौजूद थे। बैठक के बाद तीनों दलों से अलग-अलग बयान आए। तभी सवाल उठने लगे कि दो घंटे की लंबी मुलाकात के बाद आखिर सरकार गठन पर कोई बात स्पष्ट क्यों नहीं हो पाई।

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