
नई दिल्ली। देश के एविएशन रेगुलेटर डीजीसीए ने Go First एयरलाइन को उड़ान संचालन की अनुमति दे दी है। डीजीसीए के फ्लाइट ऑपरेशन शुरू करने के लिए कुछ शर्तें लागू की हैं। मई 2023 में गो एयरलाइन को फ्लाइट ऑपरेशन से बैन कर दिया गया था। हालांकि, एक बार फिर उसे गो फर्स्ट एयरलाइन के नाम से उड़ान भरने की मंजूरी मिल गई है।
गो एयरलाइन ने अपने इंजन निर्माता के साथ विवाद के बाद दिवालिया करार दिया
दरअसल, गो फर्स्ट एयरलाइन पहले गो एयरलाइन के नाम पर देश में फ्लाइट्स की कमर्शियल सर्विस देता था। लेकिन बाद में उसके आपरेशन को बैन कर दिया गया। गो एयरलाइन्स का अपने एयरबस A320 NEO विमान पर प्रैट एंड व्हिटनी इंजन के साथ विवाद चल रहा था। इसके बाद उसने मई 2023 में दिवालियापन के लिए केस दायर किया था। हालांकि, इंजन निर्माता ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि दावे निराधार थे। इसके बाद ने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) ने मोराटोरियम लगाने के साथ इस मामले को सुलझाने के लिए एक इनटरनल रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल को नियुक्त किया। 9 जून को रिजाल्यूशन प्रोफेशनल शैलेंद्र अजमेरा ने सभी लेनदारों की कमेटी से बात कर मामले को साल्व कराते हुए इसे ट्रिब्यूनल को बताया।
28 जून को एयर सर्विस शुरू करने का प्लान डीजीसीए तक पहुंचा
28 जून को रिजाल्यूशन प्रोफेशनल ने डीजीसीए को उड़ान शुरू करने का प्लान भेजाप् इसके बाद सिक्योरिटी और कंप्लायंस के लिए ऑडिट कराया गया। डीजीसीए की ऑडिट मुंबई और दिल्ली में गो फर्स्ट फेसिलिटीज पर की गई। डीजीसीए ने यह कंफर्म किया कि ऑडिट में गो फर्स्ट ने पूरा सहयोग किया। 15 जुलाई को संशोधित फ्लाइट रिज्यूम प्रोजेक्ट को फिर सब्मिट किया। इसमें 115 डेली फ्लाइट के साथ 15 एयरक्राफ्ट को ऑपरेशन में लगाने की योजना है। डीजीसीए ने रिव्यू करने के बाद इस प्रस्ताव को असेप्ट कर लिया है।
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