
नेशनल न्यूज। केंद्रीय DoPT मंत्री ने यूपीएससी में सीधी भर्ती को निरस्त किए जाने को लेकर पीएम मोदी के निर्देश पर संस्था के चेयरमैन को पत्र लिखा है। मंगलवार को केंद्र सरकार ने विज्ञापन पर रोक भी लगा दी है। यूपीएससी के जरिए लेटरल एंट्री पर 45 नियुक्तियों पर हो रहे विवाद को लेकर पीएम ने इस पर रोक लगा दी है। हालांकि इस निर्णय की एनडीए के सहयोगी दलों ने आलोचना की है।
पत्र में केंद्रीय मंत्री ने कही ये बात
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने यूपीएससी को भेजे पत्र में लिखा है, “पीएम मोदी मानते हैं कि भर्ती प्रक्रिया संविधान के अंतर्गत समानता और सामाजिक न्याय को पूर्ण करने वाली होनी चाहिए। आरक्षण के मामलों में ये और भी ज्यादा जरूरी हो जाती है। पीएम के लिए रोजगार में आरक्षण सामाजिक न्याय के लिए बहुत जरूरी है। इसका उद्देश्य अन्याय का दूर करना और सामाजिक समावेशिता को बढ़ावा देना है।
2005 में लैटरल एंट्री का किया गया था समर्थन
वर्ष 2005 में वीरप्पा मोइली कमेटी में लैटरल एंट्री का समर्थन किया गया था। सीधी भर्ती की शुरुआत के साथ कई सारी भर्तियां भी कई गईं थीं। 2014 के पहले लैटरल एंट्री के जरिए हुई भर्तियों से विवादों ने भी जन्म लिया था। आरोप लगे थे कि सरकार ने अपने चहेतों की भर्ती की है। इसलिए लैटरल एंट्री को इस बार निरस्त करने के लिए कहा गया है।
यूपीएससी में लैटरल एंट्री पर रोक सही कदम
सिविल सेवाओं में लैटरल एंट्री का सही मायने में कोई औचित्य नहीं बनता है। यूपीएससी चेयरमैन को लिखा गया पत्र सही दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। यह जरूरी है कि ऐसी कोई सभी प्रक्रिया समानता और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप ही होनी चाहिए ताकि हाशिए पर रहने वाले समुदायों को उचित अवसर मिल सके। जब सिविल सेवाओं में लेटरल एंट्री की बात आती है तो दोहरेपन के लिए कोई जगह नहीं होती है। इसमें दो ही बात होती है या तो हम सामाजिक न्याय के पक्ष में खड़े हैं या सिर्फ दिखावा कर रहे हैं।
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