
नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना का तेजस जेट दुबई एयर शो में शुक्रवार दोपहर करीब 3 बजकर 40 मिनट पर फ्लाइं डेमोंस्ट्रेशन के दौरान क्रैश हो गया। इंडियन एयर फोर्स (IAF) ने कन्फर्म किया कि इस हादसे में पायलट की मौत हो गई है। विमान जब हवा में करतब दिखा रहा था, तभी उसका संतुलन बिगड़ा और वो सीधे जमीन पर गिरते हुए आग के गोले में तब्दील हो गया। बता दें कि तेजस के इतिहास में पिछले 24 साल के दौरान ये दूसरा एयर क्रैश है। इससे पहले मार्च, 2024 में जेट राजस्थान के जैसलमेर में हादसे का शिकार हुआ था। हालांकि, उसमें पायलट बच गया था। जानते हैं तेजस विमान से जुड़े 5 फैक्ट्स।
तेजस एक सिंगल-सीटर फाइटर एयरक्राफ्ट है, हालांकि एयर फोर्स एक ट्विन-सीट ट्रेनर वेरिएंट भी ऑपरेट करती है। इंडियन नेवी भी ट्विन-सीटर वेरिएंट ऑपरेट करती है। टेक्नोलॉजी डेमोंस्ट्रेटर-1 (TD-1) की पहली टेस्ट फ्लाइट 2001 में हुई थी, और इनिशियल ऑपरेशनल क्लीयरेंस (IOC) कॉन्फ़िगरेशन वाले सेकंड सीरीज प्रोडक्शन (SP2) तेजस एयरक्राफ्ट की पहली फ्लाइट 22 मार्च, 2016 को हुई थी।
तेजस की मैक्सिमम पेलोड कैपेसिटी 4,000 kg है, जो सिंगल-पायलट, सिंगल-इंजन एयरक्राफ्ट के तौर पर काम करता है। यह मैक्सिमम 13,300 kg के टेकऑफ वेट के साथ काम करता है।
लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट तेजस एक 4.5-जेनरेशन का मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट है जिसे अटैकिंग एयर सपोर्ट देने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह ग्राउंड ऑपरेशन्स के लिए क्लोज कॉम्बैट सपोर्ट भी देता है।
2016 में, तेजस को शामिल करने वाला पहला IAF स्क्वाड्रन नंबर 45 स्क्वाड्रन, 'फ्लाइंग डैगर्स' था। यह देसी फाइटर जेट अपनी क्लास का सबसे छोटा और सबसे हल्का एयरक्राफ्ट है। इसके डाइमेंशन और कम्पोजिट स्ट्रक्चर का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल इसे हल्का बनाता है।
मेक इन इंडिया डिफेंस प्रोजेक्ट को बड़ा बढ़ावा देते हुए, भारत ने अगस्त में इंडियन एयर फ़ोर्स के लिए 97 LCA तेजस मार्क 1A फाइटर जेट खरीदने के प्रोजेक्ट को मंजूरी दी।
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