
झारखंड। ईडी अब झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ जांच के बाद शिकंजा कसते जा रही है। प्रदेश में माफिया की ओर से 600 करोड़ रुपये भूमि स्वामित्व के अवैध परिवर्तन के मामले में हेमंत सोरेन के खिलाफ जांच की जा रही है। अब ईडी की जांच में नया दावा किया गया है कि हेमंत सोरेन के पास 9 एकड़ की एक जमीन है जिसपर उन्होंने अवैध कब्जा कर रखा है। खास बात ये है कि वर्ष 2011 से वह इस जमीन पर अपना अवैध कब्जा बनाए हुए हैं। इस मामले में हेमंत सोरेन, राजस्व अधिकारी भानु प्रताप प्रसाद और दो अन्य सरकारी कर्मचारियों को भी आरोपी बनाया गया है।
आरोपपत्र में स्टेटमेंट के बाद ईडी का दावा
माफिया की ओर से भूमि स्वामित्व के अवैध परिवर्तन के कथित स्कैम को लेकर ही सोरेन की जांच चल रही है। गिफ्तारी से ठीक पहले सोरेन ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद चंपारण सोरेन को मुख्यमंत्री बनाया गया है। आरोपपत्र में उनके स्टेटमेंट्स और डॉक्यूमेंट की जांच के बाद ईडी ये दावा कर रही है कि सोरेन भू माफिया का हिस्सा बनकर अवैध रूप से आय अर्जित कर रहे थे।
श्री प्रताप हेमंत को कहता था बॉस
ईडी को जांच के दौरान भानु प्रताप के दफ्तर से कई डॉक्यूमेंट्स मिले हैं। इसके साथ ही 44 पन्नों की एक फाइल भी ईडी की टीम को मिली है जिसमें सोरने की 8.86 एकड़ की अवैध जमीन की जानकारी मिली है। आरोप पत्र में ये भी कहा गया है कि भानु प्रताप सोरेन को बॉस कहकर बुलाते थे। ईडी का दावा है कि वर्ष 2011 से सोरेन इस जमीन पर अवैध कब्जा कर रहे थे। इस जमीन की कुल कीमत 31 करोड़ रुपये आसपास आंकी गई है जिसे ईडी ने जब्त कर लिया है।
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