
श्रीनगर. जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला से प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) सोमवार को पूछताछ कर रही है। दरअसल, जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन (JKCA) में करोड़ो की धांधली मामले में फारूक से ये पूछताछ की जा रही है। बता दें कि इससे पहले भी ईडी फारूक अब्दुल्ला से इसी मामले में पूछताछ कर चुकी है। ईडी द्वारा यह पूछताछ श्रीनगर में ही चल रही है।
मालूल हो कि जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन में कथित 113 करोड़ रुपये की धांधली का मामला काफी पुराना है। ई़़डी से पहले ये जांच जम्मू-कश्मीर पुलिस कर रही थी, जिसके बाद अदालत ने इसे सीबीआई सौंप दिया था। सीबीआई की जांच के बाद में इस मामले में ईडी की एंट्री हुई क्योंकि मामले में मनी लॉन्ड्रिंग का खुलासा हुआ था।
पिछले साल भी हुई थी फारूक से पूछताछ
इस मामले की पूछताछ से पहले ईडी ने करीब एक साल पहले फारूक अब्दुल्ला से सवाल-जवाब किए थे। सीबीआई की जांच दौरान यह खुलासा हुआ था कि बोर्ड ऑफ कंट्रोल फोर क्रीकेट इन इंडिया (BCCI) ने 2002 से 2012 के बीच JKCA को राज्य में खेल का बढ़ावा देने के लिए 113 करोड़ रुपए दिए थे, लेकिन इस फंड को पूरी तरह खर्च नहीं किया गया।
खिलाड़ियों पर नहीं खर्च किया गया पैसा
इस मामले में आरोप है कि कुल 113 करोड़ की राशि में से 43.69 करोड़ रुपए से ज्यादा की हेरा-फेरी की गई। इस पैसे को खिलाड़ियों खिलाड़ियों पर खर्च किया जाना था लेकिन ऐसा नहीं किया गया। बता दें कि सीबीआई ने अपनी जांच में फारूक अब्दुल्ला का नाम शामिल किया था, अब ईडी उनके बैंक डॉक्यूमेंट्स के आधार पर उनसे सवाल-जवाब कर रही है।
क्या है फारूक पर आरोप?
सीबीआई के मुताबिक, फारूक अब्दुल्ला पर आरोप है कि उन्होंने JKCA का अध्यक्ष रहते हुए इन पैसों का गबन किया गया। यह 113 करोड़ रुपए का घोटाला है। इसमें फारूक अब्दुल्ला के साथ एसोसिएशन के तत्कालीन महासचिव मोहम्मद सलीम खान, तत्कालीन कोषाध्यक्ष अहसान अहमद मिर्जा और जम्मू कश्मीर बैंक का एक कर्मचारी बशीर अहमद मिसगर आरोपी हैं। इन लोगों पर भी आपराधिक साजिश और विश्वासघात का आरोप लगाया गया है।
हाल ही में रिहा हुए हैं फारूक
गौरतलब है कि NC नेता फारूक अब्दुल्ला जब से हाउस अरेस्ट से रिहा हुए हैं, तभी से सुर्खियों में हैं। बीते दिनों उनकी अगुवाई में ही जम्मू-कश्मीर में विपक्षी पार्टियों की 'गुपकार घोषणा' के तहत बैठक हुई थी, जिसमें अनुच्छेद 370 के मसले पर रणनीति बनाए गई थी। विपक्षी पार्टियों ने गुपकार समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं और गठबंधन बनाया है, जो अनुच्छेद 370 की वापसी की मांग करेगा।
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