
Electoral Bond Schemes: भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट के संविधान पीठ ने इलेक्टोरल बांड पर ऐतिहासिक निर्णय दिया है। कोर्ट के फैसले के बाद भारत के राजनैतिक दलों को इलेक्टोरल बांड के जरिए मिलने वाले गुप्त चंदे का रिकॉर्ड तो सार्वजनिक हो ही सकेगा साथ ही बॉन्ड पर रोक लगाकर राजनैतिक दलों को बड़ा झटका दिया है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सबसे बड़ा असर बीजेपी पर पड़ेगा।
60 प्रतिशत से अधिक दान केवल बीजेपी को...
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सबसे प्रतिकूल असर भारतीय जनता पार्टी पर पड़ेगा। आंकड़ों पर गौर करें तो 2016 से 2022 के बीच इलेक्टोरल बांड स्कीम के तहत मिले कुल डोनेशन का 60 प्रतिशत से अधिक तो सिर्फ बीजेपी को ही मिला है। इस स्कीम को केंद्र सरकार ने 2018 में नकद दान की बजाय बांड के जरिए दान का विकल्प के रूप में पेश किया था। बीजेपी सरकार ने इसे पारदर्शी व्यवस्था बताया था लेकिन इस योजना में मिलने वाले दान को देने वाले का नाम पता गुप्त रखने का प्रावधान कर दिया गया था जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने आपत्ति जताते हुए असंवैधानिक करार दिया है। डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच-न्यायाधीशों की पीठ ने चुनावी बांड योजना के बारे में कहा कि यह योजना नागरिकों के सूचना के मौलिक अधिकार का उल्लंघन करती है। सीजेआई ने कहा कि चुनावी बांड एक वित्तीय साधन है जो व्यक्तियों और व्यवसायों को राजनीतिक दलों को गुमनाम दान देने की अनुमति देता है।
2016 से 2022 तक मिला 16,437.63 करोड़ रुपये का बांड
चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, 2016 से 2022 के बीच 16,437.63 करोड़ रुपये के 28,030 चुनावी बांड बेचे गए। चुनावी बांड पाने में बीजेपी सबसे बड़ी लाभार्थी है। बीजेपी को इलेक्टोरल बांड के तहत 10122 करोड़ रुपये मिले हैं। देश के विभिन्न राजनैतिक दलों को मिले इलेक्टोरल बांड गिफ्ट्स का 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सा है। हालांकि, इलेक्टोरल बांड से चंदा पाने में कांग्रेस दूसरे नंबर पर है लेकिन बीजेपी के सामने दूर-दूर तक खड़ी नहीं होती। मुख्य विपक्षी कांग्रेस पार्टी इसी अवधि में 1,547 करोड़ रुपये या 10 प्रतिशत प्राप्त करके दूसरे स्थान पर रही। पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस को 823 करोड़ रुपये मिला है। यह सभी चुनावी बांड का करीब 8 प्रतिशत है।
देश की सात राष्ट्रीय पार्टियों को कितना मिला इलेक्टोरल बांड चंदा
बीजेपी: 10,122 करोड़ रुपये
कांग्रेस: 1,547 करोड़ रुपये
टीएमसी: 823 करोड़ रुपये
सीपीआई (एम): 367 करोड़ रुपये
एनसीपी: 231 करोड़ रुपये
बीएसपी: 85 करोड़ रुपये
सीपीआई: 13 करोड़ रुपये
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