
नई दिल्ली. सद्गुरू (Sadhguru) ने मिट्टी बचाओ अभियान के तहत हाल ही में 100 दिनों की यात्रा पूरी की है। यह जर्नी मार्च 2022 में लंदन से शुरू हुई थी। उन्होंने यूरोपीय व मिडिल ईस्ट देशों की यात्रा के बाद भारत में इसके पहले चरण का समापन किया। एक खास मुलाकात के दौरान सद्गुरू ने कहा कि दुनिया में लोगों के अधिक भोजन करने की आदत बढ़ रही है। वहीं दूसरी मिट्टी में आर्गेनिक कंटेट कम हो रहा है, जो कि भविष्य के बड़े संकट की ओर इशारा करता है। सद्गुरू ने न्यूट्रिशंस और आर्गेनिक कंटेंट के बीच संबंध के बारे में जानकारी दी।
क्यों बढ़ रही है दुनियाभर में भूख
सद्गुरू ने कहा कि हम जो भी अन्न पैदा कर रहे हैं आर्गेनिक कंटेट की कमी के कारण उसमें न्यूट्रिशन की कमी हो रही है। हमारे शरीर को पर्याप्त मात्रा में न्यूट्रिशन चाहिए होता है। अब आप समझें कि हम जो खा रहे हैं, उसमे न्यूट्रिशंस कम हैं। हमें शरीर की जरूरत के लिए ज्यादा न्यूट्रिशंस चाहिए। इसके लिए लोग ज्यादा से ज्यादा खाना खाते हैं। यही वजह है कि शरीर के न्यूट्रिशंस को पूरा करने के लिए दुनिया में भूख बढ़ रही है यानि लोग ज्यादा भोजन कर रहे हैं। शरीर न्यूट्रिशंस की डिमांड करता है लोग भोजन से उसकी पूर्ति करते हैं। जब फसलों में न्यूट्रिशंस की मात्रा बढ़ेगी तो लोग भोजन कम करेंगे क्योंकि उनके शरीर के न्यूट्रिशन की पूर्ति हो रही है। जब अन्न की खपत कम होती तो यह देश ही नहीं पूरी दुनिया के लिए राहत की बात होगी। यह पूरी मानवता के लिए फायदेमंद होगा।
क्या है न्यट्रिशंस व आर्गेनिक कंटेंट का संबंध
इसका सीधा संबंध मिट्टी से है। यदि मिट्टी में आर्गेनिक कंटेट की मात्रा संतुलित रहेगी तो केमिकल व फर्टिलाइजर्स की भी कम जरूरत पड़ेगी। मिट्टी में प्रचुर मात्रा में आर्गेनिक कंटेंट रहेगा तो अन्न में न्यूट्रिशंस की मात्रा भी संतुलित रहेगी। इसलिए हमें आर्गेनिक खेती के बजाय यह सोचना चाहिए कि मिट्टी को ही क्यों न आर्गेनिक कंटेंट से संतुलित किया जाए। मैं क्या कहता हूं कि आप साल में 6 फसल पैदा किजिए और सब कुछ खेत में ही छोड़ दीजिए। इसका मतलब कि आप पूरा का पूरा आर्गेनिक कंटेंट मिट्टी में वापस डाल रहे हैं।
खेती बढ़ाने की है जरूरत
सद्गुरू ने कहा कि आप एग्रीकल्चरल लैंड की बात करेंगे तो मैं कहूंगा कि वह जमीन जहां रोजाना लोगों के हाथ पहुंचते हैं। यानि उस जमीन पर मनुष्यों द्वारा काम किया जाता है। आप रेन फारेस्ट की बात करते हैं, यह सही है कि रेन फारेस्ट से पर्यावरण को फायदा होगा लेकिन रेन फारेस्ट ऐसी जगह है, जहां जाने की जरूरत नहीं है। रेन फारेस्ट सदियों को खुद से ही मैनेज करते रहे हैं और आगे भी यह चलता रहेगा। महत्वपूर्ण बात यह है कि लोगों को क्या चाहिए। लोगों को लकड़ियां चाहिए, शहद चाहिए, कई तरह की जड़ी-बूटियां, फल चाहिए। क्योंकि जंगल में यह सब मिलता है। लेकिन हमें अपनी जमीन पर यह उपजाना होगा और जंगलों को अकेला छोड़ना होगा। जंगलों का शोषण करना बंद होना चाहिए। हमें यह समझना होगा कि जो भी चाहिए उसके लिए जंगल की तरफ न जाएं, वह अपनी खेती के जमीन में पैदा करें। हम अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए 75 प्रतिशत जंगल को तबाह कर रहे हैं। हम सभी को संतुलन बनाने की जरूरत है।
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