Exclusive Interview/राजू श्रीवास्तव:'बेचारे रावण को कहीं सम्मान नहीं मिला, औवेसी के लोग तो BJP के साथ भी हैं'

Published : Jan 29, 2022, 02:48 PM ISTUpdated : Jan 29, 2022, 02:53 PM IST
Exclusive Interview/राजू श्रीवास्तव:'बेचारे रावण को कहीं सम्मान नहीं मिला, औवेसी के लोग तो BJP के साथ भी हैं'

सार

'उत्तर प्रदेश फिल्म विकास परिषद' के अध्यक्ष और जाने-माने हास्य अभिनेता राजू श्रीवास्तव को भरोसा है कि उत्तर प्रदेश में भाजपा 275 सीटें लाकर एक बार फिर सरकार बनाएगी। hindi.asianetnews.com से बातचीत में उन्होंने योगी की कई खूबियां गिनाईं, तो सपा पर कटाक्ष किए। राजू श्रीवास्तव केजरीवाल को लेकर पॉजिटिव सोच रखते हैं। पढ़िए और क्या बोले गजोधर भैया....

डेस्क न्यूज(अमिताभ बुधौलिया). जाने-माने हास्य अभिनेता और वर्तमान में 'उत्तर प्रदेश फिल्म विकास परिषद' के अध्यक्ष राजू श्रीवास्तव भाजपा छोड़कर सपा में गए लोगों को जनाधार विहीन बताते हैं। वहीं, अपर्णा यादव की तारीफ करते हैं। राजू श्रीवास्तव को भरोसा है कि उत्तर प्रदेश में भाजपा 275 सीटें लाकर एक बार फिर सरकार बनाएगी। hindi.asianetnews.com से बातचीत में उन्होंने योगी की कई खूबियां गिनाईं, तो सपा पर कटाक्ष किए। राजू श्रीवास्तव केजरीवाल को लेकर पॉजिटिव सोच रखते हैं। पढ़िए और क्या बोले गजोधर भैया...

यूपी चुनाव में जिस तरह से दलबदल देखा गया, आप अपने अंदाज में क्या सोचते हैं?
मेरे अंदाज में कॉमेडी वाला फ्लेवर तो रहता ही है, इसके अलावा मैं बीजेपी में हूं। उत्तर प्रदेश में मुझे राज्यमंत्री का दर्जा है। मैं यूपी फिल्म विकास परिषद का अध्यक्ष भी हूं। योगीजी के मंत्रिमंडल में हूं। तो उस हिसाब से भी सोचता हूं और हास्य कलाकार की हैसियत से भी सोचता हूं। जाहिर है, तो यही कहूंगा कि भाजपा से जो लोग गए हैं, उनका एक्चुअली कोई जनाधार नहीं था। वो पहले से ही निष्क्रिय जैसे थे। वो लोग उतने एक्टिव नहीं थे। मैंने तो दारा सिंह(दारा सिंह चौहान, मऊ जिले की मधुबन विधानसभा सीट से भाजपा के विधायक हैं, जो सपा में शामिल हुए हैं) का नाम भी नहीं सुना। एक दारा सिंह हमारे दोस्त बिंदु दारा सिंह(फिल्म अभिनेता) के पिता थे, जो कुश्तियां करते थे। उनको ज्यादा जानता हूं मैं। अपर्णा ठीक हैं, वे यादव(मुलायम सिंह यादव) परिवार की बहू हैं। लेकिन अगर ये कहा जाए कि यादव परिवार की बहू के अलावा उनकी कोई क्वालिफिकेशन नहीं है, तो उसके साथ-साथ इसका मतलब तो हम ये भी कह रहे कि अखिलेश भी तो सिर्फ बेटा हैं। जब वो मुख्यमंत्री बने थे, तब वो बेटे के सिवा कुछ नहीं थे। इस तरह से अपर्णा यादव का बीजेपी में आना, बीजेपी के लिए एक उपलब्धि है और समाजवादी पार्टी के लिए निराशाजनक बात है।

योगी की ऐसी क्या खूबी हैं, जिनके आधार पर कहा जाए कि सरकार रिपीट हो सकती है
योगी की बहुत सारी खूबियां रही हैं। उन्होंने कोरोनाकाल में जिस तरह से साज-सुविधाएं दी, उससे लोग बहुत प्रसन्न हैं। क्योंकि यह 23-24 करोड़ की आबादी वाला प्रदेश है। इतनी आबादी वाले प्रदेश में जिस तरह से कोरोना को कंट्रोल किया वो सराहनीय है। उत्तर प्रदेश से ज्यादा हाय-तौबा तो दिल्ली और मुंबई में मची थी। वहां अधिक किल्लत थी ऑक्सीजन की और बेड की। मैं योगी सरकार को बधाई दूंगा। दूसरा लॉ एंड ऑर्डर(law and order-कानून व्यवस्था) को लेकर भी लोग बहुत प्रसन्न हैं। अब बहू-बेटियां आराम से आती-जाती हैं। 

बीच में माफियाओं को जो नकेल कसी गई। विकास दुबे मारा गया, उसका मरना बहुत आवश्यक था। चाहे वो एनकाउंटर हुआ हो या न हुआ हो। चाहे वो स्वत: मरा हो। उसका मरना आवश्यक था। क्योंकि विकास दुबे ने ब्राह्मणों को बहुत मारा है। विकास दुबे के सताए हुए ब्राह्मण बहुत हैं। ऐसे दुष्ट आदमी का जाना ही अच्छा है। फिर मुख्तार अंसारी और अतीक अहमद से जिस तरह से योगी सरकार निपटी है, वो स्वागत योग्य कदम है।

यूपी में जाति-धर्म या दंगा क्या है, सबसे बड़ा मुद्दा
सर्वविदित है कि सपा हमेशा पर्टीकुलर मुस्लिम-यादवों को इकट्ठा करने की बात करती है। बीच में मुलायम सिंह यादव का एक वीडियो भी वायरल हुआ था कि ये-ये भर्ती निकली हुई हैं, इसमें ध्यान रखना फलां जाति के लोगों को लेना है। ये लोग जाति की राजनीति करते रहे हैं पहले से ही। इस बार मुझे लगता है कि लोग विकास(Development) के मुद्दे पर पर वोट देंगे।

यूपी चुनाव में  AIMIM के असदुद्दीन औवैसी और भीम आर्मी के चंद्रशेखर आजाद रावण का कितना असर पड़ेगा?
चंद्रशेखर तो बेचारे सपा में गए, उन्होंने सीट भी मांगी, उनको सीट नहीं नहीं मिली। उन्होंने बसपा के भी चक्कर लगाए। वहां भी उनको; जो वो चाह रहे थे, उचित सम्मान नहीं मिला। एक तरह से उनको दोनों पार्टियों ने साइड लाइन कर रखा है। कांग्रेस ने भी। तो मुझे लगता है कि उनका तो कोई जनाधार है नहीं। औवेसी के लोग तो वहां(AIMIM) भी हैं और बीजेपी के साथ भी रहते हैं हमेशा। वो कहीं इधर-उधर जाने वाले नहीं हैं।

कांग्रेस के स्लोगन लड़की हूं लड़ सकती हूं, पर आप क्या कहेंगे
(हंसते हुए) ये नारा बनाने तक ठीक है। कांग्रेस के लोग सिर्फ नारा बना लेते हैं। अमली जामा नहीं पहना पाते। अलवर(मूक-बधिर बच्ची से गैंग रेप का केस) की घटना को भी प्रियंका को उतने ही जोरशोर से उठाना चाहिए था। तब पता चलता कि लड़की हूं लड़ सकती हूं वाली बात। उनके मन में है। राजस्थान के ऐसे केस में तो कुछ नहीं बोलतीं। इसलिए लोगों के उनके नारों में संदेह लगता है।

हाथी की चाल इतनी सुस्त है, क्यों?
हां, बिलकुल सही कह रहे हैं। ऐसा लग रहा है कि मायावती चुनाव लड़ना ही नहीं चाहती हैं। या वो पहले से ही सरेंडर हो गई हैं।

मायावती की भाजपा ने कोई नब्ज पकड़ रखी है क्या?
नहीं, ऐसी तो कोई बात नहीं है। जिसके यहां छापा पड़ता है, सब चिल्लाते हैं। चन्नी(पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी) के रिश्तेदारों के यहां से पैसा निकला, तो बोले कि भाजपा ED और इनकम टैक्स के थ्रू यह करवा रही है। इधर, यहां कानपुर में कुछ व्यावसायियों के यहां काला पैसा निकला, तो वो सपा के थे। लेकिन यहां सपा के लोग तो जोरशोर से लड़ रहे हैं। वहां, चन्नी भी जोरशोर से चुनाव लड़ रहे हैं, इसलिए नब्ज पकड़ने जैसी कोई बात नहीं है। अब ये तो नहीं हो सकता कि चुनाव आ जाएं, तो सरकारी एजेंसियां हाथ पे हाथ धरकर बैठ जाएं। चुनाव तो हर छह महीने में कहीं ने कहीं आ ही जाते हैं, अपने देश में।

यूपी में भाजपा की कितनी सीटें आने की उम्मीद?
वैसे तो 300 प्लस सीटें आने की बात कह रहे हैं लोग, लेकिन मैं 275 तक मानकर चल रहा हूं। सरकार तो आराम से बनेगी।

पंजाब में AAP को लेकर क्या कहेंगे?
मैं भाजपा का होकर भी कहूंगा कि कहीं न कहीं केजरीवाल मुझे थोड़ा ठीक लगते हैं। उनकी पार्टी में नीचे कौन क्या है, कौन अच्छा आदमी है, कौन बुरा आदमी है, मुझे नहीं है पूरी जानकारी कि पंजाब में उन्होंने किस-किसको टिकट दिया है, उनका आचरण कैसा है?

जोक्स में किसे छोड़ देते हैं
जोक्स मैं सब पर करता हूं। जिस पार्टी में हूं, उन पर भी जोक्स करता हूं। मोदी पर भी करता हूं। राहुल गांधी पर भी जोक्स करता हूं। राहुल गांधी बीच-बीच में नानी के यहां चले जाते हैं, वो भी जरूरी है। नानी पका-पकाकर खिलाती होंगी। खूब लाड़ लड़ाती होंगी। लेकिन मैं यही कहूंगा कि जब देश में कोई समस्या हो, देश में उनकी जरूरत है, कांग्रेसियों को उनकी जरूरत हो, ऐसे समय में देश के साथ खड़े रहना चाहिए उनको।

एक बार प्रियंका गांधी ने कहा था कि कांग्रेस के दरवाजे सबके लिए खुले हैं, तो मैंने ये कहा कहा था कि बीच-बीच में दरवाजे बंद भी कर लो, नहीं तो जो अंदर हैं, वे भी  बाहर निकले जा रहे हैं।

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