
नेशनल डेस्क। इस बात की चर्चा थी कि भारतीय नौसेना (Indian Navy) ईरान और रूस के साथ संयुक्त अभ्यस में शामिल होगी। ईरान और रूस के साथ भारीय नौसना की यह ड्रिल हिंद महासागर के उत्तरी क्षेत्र में होने की बात कही जा रही थी। वहीं, भारतीय नौसेना के सूत्रों ने इसका खंडन किया है। ईरान की नौसेना के डिप्टी कमांडर रियर एडमिरल गोलामरेजा तहानी ने कहा कि भारतीय नौसेना भी रूस की नेवी के साथ हो रही ईरान की नौसेना की ड्रिल में शामिल होगी। इसके बाद इसे लेकर खबरों का बाजार गर्म हो गया और भारतीय मीडिया के साथ ही इंटरनेशनल मीडिया में भी इसे लेकर रिपोर्ट्स पब्लिश हुईं। वहीं, भारतीय नौसेना ने इसे झूठी खबर यानी फेक न्यूज बताया है।
क्या कहा नौसेना के सूत्रों ने
भारतीय नौसेना के सूत्रों ने इस बात से इनकार किया है कि वह इस ड्रिल में हिस्सा लेने जा रही है। भारतीय नौसेना ने कहा कि ईरान की सरकार ने जॉइंट नेवल एक्सरसाइज के लिए रिक्वेस्ट भेजा था, लेकिन उसे स्वीकार नहीं किया गया। सूत्रों ने कहा कि भारतीय नौसेना का इसमें भाग लेना संभव नहीं है। यह संयुक्त अभ्यास क्षेत्र में सुरक्षा और समुद्री व्यापार को बढ़ावा देने के लिए किया जा रहा है।
क्या दिया इसे नाम
ईरान और रूस के इस जॉइंट एक्सरसाइज को मैरीटाइम सिक्युरिटी बेल्ट (Maritime Security Belt) नाम दिया गया है। इसमें करीब 17,000 स्क्वेयर किलोमीटर के क्षेत्र को कवर किया जाएगा। इस संयुक्त अभ्यास में ईरान की नेवी, इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स और रूसी नेवी हिस्सेदारी करेगी। ईरानी मीडिया ने रियर एडमिरल तहानी के हवाले से कहा है कि भारतीय नौसेना भी इस जॉइंट नेवल एक्सरसाइज में शामिल होगी। इससे पड़ोसी देशों के लिए शांति और मित्रता का संदेश जाएगा।
कई देशों के बीच बढ़ रहा तनाव
बता दें कि हाल के दिनों में दुनिया के कई देशों के बीच तनाव बढ़ा है। अमेरिका और यूरोपियन यूनियन के देशों के बीच संबंध खराब हुए हैं, वहीं ईरान ने रूस और चीन के साथ सैन्य सहयोग बढ़ाया है। साल 2019 और 2020 में तेहरान में दोनों देशों की सेनाओं के साथ ईरान की सेना ने संयुक्त अभ्यास किया था।
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