
किसान आंदोलन। किसान नेताओं और केंद्र सरकार के बीच चौथे दौर की बातचीत रविवार (18 फरवरी) देर रात संपन्न हुई। इस बैठक में MSP के लिए खरीद का 5 साल के कॉन्ट्रैक्ट का प्रस्ताव रखा गया। ये कॉन्ट्रैक्ट उड़द दाल, मसूर दाल, मक्का और कपास पर लागू किया जाएगा। ये कॉन्ट्रैक्ट NCCF, NAFED और CCI के साथ किए जाएंगे। बता दें कि बैठक रविवार रात 8:15 बजे शुरू हुई और सोमवार को लगभग 1 बजे समाप्त हुई।
बैठक चंडीगढ़ सेक्टर 26 स्थित महात्मा गांधी राज्य लोक प्रशासन संस्थान में हुई। क्रेंद सरकार की तरफ से कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री अर्जुन मुंडा, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और गृह राज्य मंत्री नित्यानंद बैठक में शामिल हुए। इसके अलावा पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान भी वार्ता में शामिल हुए।
पंजाब किसान मजदूर संघर्ष समिति के महासचिव सरवन सिंह पंढेर ने बैठक से जुड़ी बातचीत की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि केंद्र ने पांच साल की योजना सहित कुछ विचार पेश किए, जिसके बाद किसानों ने 'दिल्ली चलो' मार्च पर रोक लगा दी है। हम साथी किसानों के साथ केंद्र द्वारा दिए गए प्रस्तावों पर चर्चा करेंगे, विशेषज्ञों की राय लेंगे। हम अगले दो दिनों में सरकार के प्रस्ताव पर चर्चा करेंगे और सरकार भी विचार-विमर्श करेगी।
दिल्ली चलो मार्च जारी रखने की कि बात
चंडीगढ़ में बैठक खत्म होने के बाद किसान नेता और पंजाब किसान मजदूर संघर्ष समिति के महासचिव सरवन सिंह पंढेर ने मीडिया को बताया कि हमें सकारात्मक परिणाम की उम्मीद है, अन्यथा हम अपना दिल्ली चलो मार्च जारी रखेंगे। इस दौरान किसान नेताओं के साथ बैठक करने वाले तीन केंद्रीय मंत्रियों के पैनल ने सरकारी एजेंसियों द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य पर दालों, मक्का और कपास की फसलों की खरीद के लिए पांच साल की योजना का प्रस्ताव रखा।
राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता महासंघ (NCCF) और भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन महासंघ (NAFED) जैसी सहकारी समितियां उन किसानों के साथ अनुबंध करेंगी जो खरीद के लिए अरहर दाल, 'उड़द दाल', मसूर दाल या मक्का उगाते हैं। इस दौरान उनकी फसलों पर 5 के लिए MSP लागू रहेगा। केंद्र ने ये भी प्रस्ताव दिया कि भारतीय कपास निगम (CCI) एक कानूनी समझौते के जरिए पांच साल तक किसानों से MSP पर कपास खरीदेगा। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि खरीदी गई मात्रा की कोई सीमा नहीं होगी और एक पोर्टल विकसित किया जाएगा।ये पंजाब की खेती को बचाएगा, भूजल स्तर में सुधार करेगा और भूमि को बंजर होने से बचाएगा जो पहले से ही तनाव में है।
किसान क्यों कर रहे हैं प्रदर्शन?
संयुक्त किसान मोर्चा और किसान मजदूर मोर्चा सहित 200 से अधिक किसान संघ कई मांगों को स्वीकार करने के लिए केंद्र पर दबाव बनाने के लिए 13 फरवरी से शुरू हुए 'दिल्ली चलो' मार्च में भाग ले रहे हैं। रविवार को अपने मार्च के पांचवें दिन किसान पंजाब-हरियाणा सीमा के शंभू और खनौरी बिंदुओं पर डटे रहे। इस दौरान कृषि निकाय न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की गारंटी देने वाले कानून की मांग कर रहे हैं।
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