
नई दिल्ली. कृषि कानूनों के विरोध में किसानों का आंदोलन जारी है। इसी बीच शनिवार को किसानों और सरकार के बीच हुई बातचीत भी बेनतीजा रही। अब केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी ने कहा, सरकार लिखित में दे सकती है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य बरकरार रखा जाएगा। हालांकि, चौधरी ने यह भी कहा कि उन्हें नहीं लगता कि ये असली किसान हैं।
केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी ने समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा, मैं नहीं मानता कि असली किसान, जो अपने खेतों में काम कर रहे हैं, वे इस बारे में चिंतित हैं। उन्होंने कहा, कुछ राजनीतिक लोग आग में घी डालने की कोशिश कर रहे हैं। जबकि देश के किसान नए कानूनों के समर्थन में हैं।
राजनीति में ना फंसे किसान
कैलाश चौधरी ने कहा, मुझे लगता है कि कांग्रेस सरकार और विपक्ष किसानों को भड़का रहे हैं। देश के किसान नए कानूनों के साथ हैं। लेकिन कुछ राजनीतिक लोग आग में घी डालने की कोशिश में हैं। चौधरी ने कहा, हमें मोदी सरकार और किसानों पर पूरा भरोसा है। मुझे यकीन है कि किसान कोई ऐसा फैसला नहीं करेंगे, जिससे अशांति हो।
कानून वापस लेने की मांग पर अड़े किसान
इससे पहले किसानों और सरकार के बीच शनिवार को 5वें दौर की वार्ता हुई थी। इस दौरान किसानों ने सरकार से साफ कर दिया है कि वे पीछे नहीं हटेंगे। किसान नेताओं और केंद्रीय मंत्रियों की बैठक में गहमागहमी भी हुई। वहीं, 9 दिसंबर को अगले दौर की बातचीत होगी। सरकार ने भी साफ कर दिया है कि वह संसोधन के लिए तैयार है, लेकिन कानून वापस नहीं लिए जाएंगे।
कांग्रेस का भारत बंद को समर्थन
उधर, कांग्रेस ने किसानों के भारत बंद का समर्थन किया है। पार्टी के प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि कांग्रेस 8 दिसंबर को अपने हर ऑफिस पर प्रदर्शन करेगी। इससे पहले लेफ्ट दलों, राष्ट्रीय जनता दल, तृणमूल कांग्रेस जैसी पार्टियां भी 8 दिसंबर को होने वाले भारत बंद का समर्थन कर चुकी हैं।
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