Halwa Ceremony: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हलवा खिलाकर कराया अधिकारियों का मुंह मीठा

Published : Jan 24, 2024, 08:43 PM ISTUpdated : Jan 26, 2024, 01:52 PM IST
Pre Budget Halwa Ceremony

सार

वित्त मंत्रालय में बुधवार शाम को 'हलवा समारोह' हुआ। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने मंत्रालय के अधिकारियों का मुंह मीठा कराया। 

नई दिल्ली। भारत सरकार के वित्त मंत्रालय ने अंतरिम केंद्रीय बजट 2024 (Union Budget 2024) तैयार कर लिया है। बुधवार शाम को वित्त मंत्रालय में बजट तैयार होने की निशानी प्री-बजट 'हलवा समारोह' आयोजित हुई। इस दौरान लोहे की बड़ी कड़ाही में हलवा लाया गया। 

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कड़ाही खोला और हलवा खिलाकर अपने मंत्रालय के अधिकारियों का मुंह मीठा कराया। निर्मला सीतारमण के साथ केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री डॉ भागवत कराड भी समारोह में शामिल हुए।

बजट की लॉक-इन प्रक्रिया शुरू

दरअसल, बजट तैयारी की "लॉक-इन" प्रक्रिया शुरू होने से पहले हर साल पारंपरिक हलवा समारोह आयोजित किया जाता है। आगामी बजट की गोपनीयता बनाए रखने और संसद में पेश होने से पहले किसी भी लीक को रोकने के लिए लॉक-इन प्रक्रिया होती है। हलवा समारोह के दौरान उन लोगों को हलवा दिया जाता है जो सीधे तौर पर बजट बनाने से जुड़े होते हैं। इसके बाद अधिकारियों को तब तक वित्त मंत्रालय में रहना होता है जब तक कि वित्त मंत्री संसद में बजट पेश नहीं कर देते।

दशकों से हो रहा हलवा खिलाने की परंपरा का पालन

दशकों से इस परंपरा का पालन किया जा रहा है। यह कोई खास काम शुरू करने से पहले मीठा खाने की भारतीय परंपरा से प्रेरित है। यह एक तरह से बजट तैयार करने में जुटे लोगों को धन्यवाद देने का तरीका भी है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को अंतरिम बजट पेश करेंगी। यह लोकसभा चुनाव 2024 से पहले मोदी सरकार का आखिरी बजट है। इस बजट को लोकसभा चुनाव के बाद सरकार बनने तक की वित्तीय जरूरतों को पूरा करने को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है।

PREV

National News (नेशनल न्यूज़) - Get latest India News (राष्ट्रीय समाचार) and breaking Hindi News headlines from India on Asianet News Hindi.

Recommended Stories

Earthquake Today: भारत-म्यांमार सीमा के पास तगड़ा भूकंप, कोलकाता तक महसूस हुए झटके
नोएडा की डॉ. अंजना सिंह सेंगर ने श्रीलंका में जीता एशिया आइकॉन अवॉर्ड, हिंदी साहित्य को मिली ग्लोबल पहचान