
नई दिल्ली. कृषि कानूनों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने वाले किसानों से सुप्रीम कोर्ट की बनाई गई कमेटी के सदस्य आज मिलने वाली है। बैठक दिल्ली के पूसा इंस्टीट्यूट में होनी तय है, लेकिन भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने साफ कह दिया है कि हमें नहीं पता। हम कमेटी की बैठक में नहीं जा रहे हैं। आंदोलन करने वाले लोगों में से कोई भी अदालत के पास नहीं गया। अध्यादेश के माध्यम से सरकार विधेयक लाई, इसे सदन में पेश किया गया। यह उसी रास्ते से वापस आएगा जहां से आया था।
सुप्रीम कोर्ट ने 11 जनवरी को सुनवाई के दौरान तीनों कृषि कानूनों को लागू करने पर रोक लगा दी थी। कोर्ट ने चार लोगों का पैनल बनाया, जो किसान और सरकार से बात कर मामले को सुलझाएगा। भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह मान ने खुद को कमेटी से अलग कर लिया है। कमेटी में शामिल महाराष्ट्र के शेटकारी संगठन के अध्यक्ष घनवंत ने सोमवार को कहा था, हम कल मिलने जा रहे हैं। किसानों से उनकी शर्तों पर ही चर्चा की जाएगी और भविष्य की रणनीति तय करेंगे। पैनल में शामिल लोग देशभर के किसानों के विचारों को सुनेंगे। दो महीने के भीतर सुप्रीम कोर्ट को रिपोर्ट देनी है।
20 जनवरी को 10वें दौर की बात
सरकार और किसानों के बीच 20 जनवरी को 10वें दौर की बातचीत होगी। सरकार ने कहा था कि जब भी अच्छी चीजें या उपाय किए जाते हैं तो बाधाएं आती हैं और इस मुद्दे को हल करने में अधिक समय लग रहा है क्योंकि किसान नेता अपने तरीके से समाधान चाहते हैं।
कृषि सचिव संजय अग्रवाल ने 40 किसान यूनियनों को लिखे पत्र में कहा था, अब बैठक 20 जनवरी को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में दोपहर 2 बजे होगी। आपसे अनुरोध है कि बैठक में शामिल हों।
अब तक क्या हुआ है?
सरकार और किसानों के बीच पिछले दौर की बातचीत किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंची। किसान यूनियन नए कानूनों को रद्द करने की अपनी मुख्य मांग पर अड़े हुए हैं, लेकिन सरकार ने ऐसा करने से इनकार कर दिया है।
किसानों के ट्रैक्टर मार्च पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह दिल्ली पुलिस को तय करना है कि राजधानी में कौन आए और कौन नहीं। किसानों ने ऐलान किया था कि 26 जनवरी को वे करीब 50 किलोमीटर लंबा ट्रैक्टर मार्च निकालेंगे। इसी मामले को लेकर दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाकर मार्च को रोकने की बात कही थी।
सितंबर 2020 में केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए तीन कृषि कानूनों के खिलाफ हजारों किसान पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में लगभग दो महीने से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
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