
नई दिल्ली। मोहम्मद मुइज्जू के राष्ट्रपति बनने के बाद से भारत के साथ मालदीव के रिश्ते ठीक नहीं हैं। चीन समर्थक मुइज्जू ने भारत के साथ रिश्ते ठीक करने की जगह बिगाड़ने के लिए काम किए हैं। हद तो तब हो गई जब मुइज्जू सरकार के मंत्रियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत के लोगों के खिलाफ अपमानजनक बातें की। इस वजह से भारत के लोगों ने सोशल मीडिया पर मालदीव के बहिष्कार का आह्वान किया।
भारतीयों द्वारा बहिष्कार किए जाने का असर मालदीव के पर्यटन पर पड़ा है। पहले भारतीय मालदीव आने वाले विदेशी पर्यटकों में पहले स्थान पर थे, अब पांचवे स्थान पर पहुंच गए हैं। मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद ने भारत से मुइज्जू सरकार द्वारा की गई गलतियों के चलते माफी मांगी है। वह भारत आए हैं। उन्होंने शुक्रवार को कहा कि मालदीव के लोग माफी मांगते हैं।
मोहम्मद नशीद ने कहा, “इससे (भारतीयों द्वारा किए गए बहिष्कार) मालदीव पर बहुत असर पड़ा है। मैं भारत आया हूं। मैं इसके बारे में बहुत चिंतित हूं। मैं कहना चाहता हूं कि मालदीव के लोगों को खेद है, हमें दुख है कि ऐसा हुआ। हम चाहते हैं कि भारत के लोग छुट्टियां मनाने मालदीव आएं, हमारे आतिथ्य सत्कार में कोई बदलाव नहीं होगा।”
भारत ने मालदीव पर नहीं डाला दबाव
मुइज्जू ने मालदीव से भारतीय सैनिकों को निकालने का फैसला किया था। इस संबंध में नशीद ने कहा कि भारत ऐसे मामलों में हमेशा जिम्मेदार दृष्टिकोण अपनाता है। भारत ने दबाव डालने के बजाय राजनयिक चर्चा पर ध्यान दिया। उन्होंने कहा, "जब मालदीव के राष्ट्रपति चाहते थे कि भारतीय सेना के कर्मचारी चले जाएं, आप जानते हैं भारत ने क्या किया। उन्होंने दबाव नहीं डाला। कोई शक्ति प्रदर्शन नहीं किया। बल्कि मालदीव की सरकार से बस इतना कहा, 'ठीक है, आइए इस पर चर्चा करते हैं।"
रबर बुलेट्स और आंसू गैस के गोले खरीद रही मुइज्जू सरकार
मालदीव और चीन के बीच हाल में रक्षा समझौते हुए हैं। इसपर नशीद ने कहा कि यह रक्षा समझौता नहीं, बल्कि उपकरणों की खरीद के लिए की गई डील है। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि मुइज्जू कुछ उपकरण मुख्यरूप से रबर बुलेट्स और आंसू गैस के गोले खरीदना चाहते हैं। यह बहुत दुर्भाग्य की बात है कि सरकार को और अधिक रबर की गोलियों और आंसू गैस के गोलों की जरूरत महसूस हुई है। बंदूक के दम पर शासन नहीं किया जा सकता।”
गौरतलब है कि भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने हाल ही में कहा था कि राष्ट्रों के बीच गलतफहमियां पैदा हो सकती हैं। उन्होंने उम्मीद जताई थी कि राजनयिक माध्यमों से विवाद सुलझ जाएगा। विदेश मंत्री ने कहा था, "मानवता मानवता है, कूटनीति कूटनीति है और राजनीति राजनीति। पूरी दुनिया हमेशा दायित्व से नहीं चलती। इसलिए जब हमें ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ता है तो कूटनीति की एकमात्र रास्ता है।"
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जयशंकर ने कहा था, “हमें लोगों को समझाना होगा। कभी-कभी लोगों को चीजों की पूरी जानकारी नहीं होती। कभी कभी लोग इस बात से गुमराह हो जाते हैं कि दूसरे क्या कह रहे हैं।”
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