
असम के वोटरों ने कांग्रेस नेतृत्व वाले महाजोत गठबंधन का साथ दिया या सर्वानेंद सोनोवाल पर फिर भरोसा जताया, इस सवाल का जवाब तो 2 मई को ही मिल सकेगा लेकिन फिलहाल दो बार सांसद रह चुके कांग्रेस नेता गौरव गगोई ने असम में जीत का दावा किया है। एशियानेट से खास बातचीत में कांग्रेस नेता ने दावा किया कि जनता का मूड इस बार कांग्रेस को सत्ता में देखने का है। पेश है बातचीत का प्रमुख अंशः
आप कांग्रेस की जीत के प्रति कितना आश्वस्त हैं, सर्वे तो बीजेपी की एकतरफा जीत की ओर इशारा कर रहे?
मैं जीत के प्रति पूरी तरह से आश्वस्त हूं। इस बार असम के पहले फेज का रिजल्ट बेहद चैकाने वाला आएगा। इसके अलावा दूसरे व तीसरे चरण में हम अनुमान से अधिक बेहतर किए हैं। हम सबको पूरा विश्वास है कि हमारा महागठबंधन इस बार 101 सीटें जीतने जा रहे हैं।
इस चुनाव में कांग्रेस को तरुण गगोई की कमी कितनी खल रही, क्या इसका प्रभाव पड़ेगा?
निसंदेह हम सबको उनकी कमी बेहद खल रही है लेकिन यह भी लग रहा है कि उनकी आत्मा हम सबको गाइड कर रही है। लोग भी उनको याद कर रहे हैं और खुद को जुड़ा हुआ महसूस कर पाॅजिटिव रिस्पांस दे रहे हैं।
पीएम मोदी व अमित शाह ने धुआंधार मीटिंग असम में की लेकिन कांग्रेस का टाॅप लीडर कोई यहां नहीं आया, क्या वजह है ?
कांग्रेस व बीजेपी के बीच कैंपेन में बहुत फर्क है। बीजेपी ने केवल बड़ी रैलियां की है, वह लोग भाषण दिए और निकल लिए लेकिन कांग्रेस ने लोगों के बीच कैंपेन किया। लोक केंद्रित प्रचार अभियान चलाया, लोगों के बीच गए। हमारे राज्य स्तर के नेता बड़ी रैलियां कर रहे हैं, छोटे कस्बों में जा रहे, छात्र-व्यापारियों-किसानों के बीच जा रहे। सभी वर्गाें से बात कर रहे, उनकी समस्याओं को सुन रहे।
इसी तरह राहुल गांधी-प्रियंका गांधी भी हर वर्ग के बीच जा रहे। प्रियंका अभी कुछ दिन पूर्व चाय बागानों में गईं, राहुल काॅलेजों में जा रहे हैं।
सीएए का कितना प्रभाव असम में है, कांग्रेस ने इस मुद्दे पर लोगों के बीच कैसे पैठ बनाया?
सीएए को लेकर असम के लोग काफी संवेदनशील हैं। लोगों का मानना है कि अगर बीजेपी सफलतापूर्वक सीएए को लागू कर देती है तो असम के लिए काफी नुकसानदायक साबित होगा। असम के लोगों को यह भरोसा है कि राहुल गांधी सीएए मुद्दे पर हम लोगों के साथ हैं। वह लगातार सीएए का विरोध कर रहे हैं। कांग्रेस घोषणा पत्र में भी है।
पिछली बार एआईयूडीएफ 80 सीटों पर चुनाव लड़ा था। इस बार गठबंधन में है और महज 30 सीटों पर मैदान में है। क्या कांग्रेस को यह मौका दिया जा रहा है?
हम बहुत ही आभारी हैं अपने सहयोगी दलों एआईयूडीएफ, बीपीएफ, आंचलिक गण मोर्चा आदि के जो हमारे साथ उदारता से हैं। यह किसी पार्टी का चुनाव नहीं है बल्कि गठबंधन चुनाव लड़ रहा हैं। हम एक साथ सीएए को हराने के लिए आए हैं। अब असम में असमानता का खात्मा होने को है।
तीन चरण के चुनाव हो चुके हैं। असम के लोगों का सेंटीमेंट कैसा रहा इस दौरान, जो आपने क्षेत्र में महसूस किया?
आपको बता दें कि एक अंडरकरंट है कांग्रेस और महाजोत गठबंधन के पक्ष में। लोगों को नए नेतृत्व पर भरोसा हो रहा है। तरुण गगोई की गैरमौजूदगी में भी असम को कांग्रेस नेतृत्व पर भरोसा हो रहा है। लोग वर्तमान सरकार और नेतृत्व से बेहद नाराज है।
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