
Gandhi Peace Prize 2021: गांधी शांति पुरस्कार से सम्मानित गोरखपुर के गीता प्रेस ने बड़ा ऐलान किया है। गीता प्रेस प्रबंधन ने कहा- वह गांधी शांति सम्मान तो स्वीकार करेंगे लेकिन पुरस्कार की धनराशि को नहीं लेंगे। हमारी 100 साल की परंपरा रही है कि हम कोई भी धनराशि स्वीकार नहीं करते हैं। बता दें, केंद्र सरकार ने 2021 का गांधी शांति सम्मान गीता प्रेस गोरखपुर को देने का ऐलान किया है।
प्रबंधक ने कहा-हम परंपरा के विपरीत नहीं जा सकते
गीता प्रेस के प्रबंधक लाल मणि तिवारी ने कहा, 'गीता प्रेस ने 100 सालों में कभी कोई आर्थिक मदद या चंदा नहीं लिया। इनके अलावा सम्मान के साथ भी मिलने वाली किसी तरह की धनराशि को स्वीकार नहीं किया। यह सम्मान हमारे लिए हर्ष की बात है। बोर्ड ने यह फैसला लिया है कि सम्मान के साथ मिलने वाली धनराशि को स्वीकार नहीं किया जाएगा।'
दुनिया में धार्मिक व आध्यात्मिक किताबों के सबसे बड़े प्रकाशक
दुनिया में सबसे बड़े प्रकाशक गीता प्रेस की स्थापना 1923 में हुई थी। अब तक गीता प्रेस में 15 भाषाओं में 41.7 करोड़ पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं। इसमें अकेले 16.21 करोड़ श्रीमद भगवद गीता ही हैं। गीता प्रेस में फिलहाल 15 भाषाओं में 1848 प्रकार की किताबें प्रकाशित हो रही हैं। देशभर में प्रेस की 20 ब्रांच हैं। गीता प्रेस सनातन-धर्म की अब तक 92 करोड़ किताबें छाप चुका है। यह एक रिकॉर्ड है। गीता प्रेस में इस साल 2 करोड़ 42 लाख किताबें छापी गई हैं।
100 साल होने पर गीता प्रेस को गांधी शांति पुरस्कार के लिए पीएम मोदी की कमेटी ने चुना
गांधी शांति पुरस्कार पाने वालों को एक करोड़ रुपये, एक प्रशस्ति पत्र, एक पट्टिका और एक उत्कृष्ट पारंपरिक हस्तकला / हथकरघा आइटम दिया जाता है। 18 जून को पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली जूरी ने सर्वसम्मति से साल 2021 के लिए गांधी शांति पुरस्कार के लिए गीता प्रेस गोरखपुर के नाम पर मुहर लगाई। पढ़िए पूरी खबर…
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