
पणजी। गोवा के मशहूर नाइटक्लब ‘बर्च बाय रोमियो लेन’ से जुड़ा मामला अब और उलझता जा रहा है। क्लब में आग लगने के बाद जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, वैसे-वैसे नई जानकारियां सामने आती रहीं। इसी बीच क्लब के लाइसेंस होल्डर बताए जा रहे सौरभ लूथरा और गौरव लूथरा को थाईलैंड में हिरासत में ले लिया गया है। उनके पासपोर्ट रद्द हो चुके हैं, इंटरपोल ब्लू कॉर्नर नोटिस एक्टिव है, और दिल्ली की कोर्ट ने गिरफ्तारी से सुरक्षा देने से भी इनकार कर दिया है। क्या लूथरा ब्रदर्स भारत वापस लाए जाएंगे? और अगर हां, तो कब और कैसे?
आग लगने की रात जो जानकारी सामने आई, उसने जांच को शक के घेरे में डाल दिया। रिकॉर्ड के मुताबिक 7 दिसंबर रात 1:17 बजे दोनों भाइयों ने थाईलैंड के लिए टिकट बुक की। उसी समय गोवा पुलिस और फायर ब्रिगेड आग बुझाने और फंसे लोगों को बचाने में लगी थी। सुबह 5:30 बजे दोनों इंडिगो की फ्लाइट 6E 1073 से फुकेट रवाना हो गए। जांच एजेंसियों को यह समय देखकर शक हुआ कि क्या आग लगने के तुरंत बाद से ही भागने की योजना बनाई गई थी?
थाईलैंड के नेशनल क्राइम ब्यूरो ने आधिकारिक तौर पर दोनों भाइयों को हिरासत में लिया है। सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई गोवा पुलिस की तेज होती जांच, पासपोर्ट रद्द होने, और ब्लू कॉर्नर नोटिस के कारण हुई। ब्लू कॉर्नर नोटिस का मतलब है कि किसी संदिग्ध के मूवमेंट, लोकेशन और गतिविधि पर नजर रखना और उसकी जानकारी दूसरे देश से साझा करना। यानी भारत ने इंटरपोल के जरिए उन पर नजर रखवाई हुई थी।
दिल्ली की अदालत में लूथरा ब्रदर्स ने कहा कि वे भागे नहीं थे। वे बिजनेस मीटिंग के लिए थाईलैंड गए थे। वे सिर्फ “लाइसेंस होल्डर” हैं, क्लब के असली मालिक नहीं लेकिन कोर्ट ने यह दलील नहीं मानी, और कहा कि उन्हें अभी कोई अंतरिम सुरक्षा (arrest से बचाव) नहीं दी जा सकती। उनकी ट्रांजिट एंटीसिपेटरी बेल पर अगली सुनवाई तय कर दी गई है।
हां, लाए जा सकते हैं, क्योंकि भारत-थाईलैंड एक्सट्राडिशन ट्रीटी 2015 से लागू है। दोनों देशों के बीच मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फाइनेंसिंग पर खास MoU है। ट्रीटी के तहत भारत की सेंट्रल अथॉरिटी विदेश मंत्रालय है और थाईलैंड की अटॉर्नी जनरल ऑफिस यानी भारत आधिकारिक रूप से अनुरोध कर सकता है कि दोनों को भारत भेजा जाए, और मामला ज्यादा गंभीर होने के कारण इसकी संभावना काफी मजबूत है।
हालांकि यह अकेले पर्याप्त सबूत नहीं हैं, लेकिन जांच एजेंसियां इन गतिविधियों को "संभावित भागने की कोशिश" मानकर देख रही हैं।
डिपोर्टेशन तभी होता है जब व्यक्ति ने किसी देश के इमिग्रेशन नियमों का उल्लंघन किया हो। फिलहाल मामला एक्सट्राडिशन की तरफ ज्यादा बढ़ रहा है, न कि सीधे डिपोर्टेशन की तरफ। भारत आधिकारिक कागजी प्रक्रिया शुरू करेगा, और थाईलैंड फैसला करेगा कि उन्हें भारत सौंपा जाए या नहीं।
इस केस में हर दिन नए तथ्य सामने आ रहे हैं। थाईलैंड में गिरफ्तारी, पासपोर्ट रद्द होना, कोर्ट का रवैया, आग का समय, टिकट बुकिंग…सारी बातें यह सवाल खड़ा करती हैं कि क्या यह सिर्फ एक हादसा था या उसके पीछे कोई छिपा हुआ सच है?
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