
Gujrat News: कतर में जासूसी के आरोप में एक भारतीय इंजीनियर को गिरफ्तार किया गया है। इंजीनियर अमित गुप्ता पिछले तीन माह से कतर की हिरासत में हैं। रिपोर्टों के मुताबिक भारत का विदेश मंत्रालय प्रभावित परिवार को हर संभव मदद मुहैया कराने के प्रयास कर रहा है।
भारतीय टेक कंपनी टेक महिंद्रा के लिए काम करने वाले अमित गुप्ता को कतर में जारी एक जांच के दौरान हिरासत में लिया गया है। अमित गुप्ता पर कतर के अधिकारियों ने संवेदनशील जानकारियां चुराने के आरोप लगाए हैं। मूल रूप से गुजरात के वडोदरा के रहने वाले अमित गुप्ता की मां ने मीडिया को बताया है कि उन्होंने कतर में भारतीय राजदूत से भी मुलाकात की है और इस मुद्दे पर चर्चा की है।
वडोदरा में मीडिया से बात करते हुए अमित गुप्ता की मां पुष्पा गुप्ता ने कहा कि उन्हें इसी साल एक जनवरी को हिरासत में लिया गया था। रिपोर्टों के मुताबिक, भारतीय विदेश मंत्रालय को इस घटनाक्रम की जानकारी है और प्रभावित परिवार की मदद करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
हालांकि, इस मामले के बारे में कोई अधिकारिक बयान विदेश मंत्रालय ने नहीं दिया है लेकिन मीडिया से बात करते हुए एक सूत्र ने कहा है, “हमारा दूतावास इस मामले पर नजर रखे हुए और हर संभव मदद मुहैया कराई जा रही है।” दूतावास गुप्ता और उनके वकील के निरंतर संपर्क में है। यही नहीं कतर के अधिकारियों से भी इस मामले की लगातार जानकारी ली जा रही है।
हालांकि गुप्ता की मां ने मीडिया को बताया है कि अपने बेटे का मामला समझने के लिए वो कतर गईं थीं और वहां भारतीय राजदूत से भी मुलाकात की थी। लेकिन उनका दावा है कि उन्हें अभी तक इस मामले में कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली है। वहीं, बीजेपी के सांसद हेमांग जोशी ने मीडिया को बताया है कि गुप्ता टेक महिंद्रा में सीनियर मैनेजर हैं और वो पिछले दस सालों से कतर में कार्यरत हैं।
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गुप्ता को एक जनवरी को कतर के सुरक्षा अधिकारियों ने हिरासत में लिया था। तब से ही वो हिरासत में हैं। जोशी के मुताबिक, गुप्ता का परिवार एक महीने तक कतर में रहा लेकिन उनकी अपने बेटे से मुलाकात नहीं हो सकी। ये कतर में संवेदनशील जानकारियां जुटाने के आरोप में 2022 के बाद से भारतीयों की दूसरी गिरफ्तारी है। इससे पहले आठ पूर्व भारतीय नोसैनिकों को कतर में जासूसी के आरोप में हिरासत में लिया गया था।
इन अधिकारियों को साल 2023 में मौत की सजा सुनाई गई थी। हालांकि बाद में कतर की अदालत ने उनकी सजा को रद्द कर दिया था और फरवरी 2024 में कतर के अमीर के आदेश पर उन्हें रिहा कर दिया गया था। इन पूर्व भारतीय अधिकारियों की रिहाई के लिए भी भारतीय विदेश मंत्रालय को लंबे समय तक कूटनीतिक प्रयास करने पड़े थे।
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