Action Against Obscene and Pornographic Content: संसदीय पैनल ने OTT प्लेटफार्मों पर अश्लील कंटेंट पर चिंता जताई। सरकार से AI का इस्तेमाल कर नाम बदलने वालों पर कार्रवाई की मांग की गई है।

Action Against Obscene and Pornographic Content: भारत की संसदीय पैनल ने ओटीटी प्लेटफार्मों पर अश्लील और पोर्नोग्राफिक कंटेंट के प्रसारण को लेकर चिंता व्यक्त की है। पैनल ने सरकार से इस प्रकार के प्लेटफार्मों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने की अपील की है, जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करके प्रोग्राम के नाम बदलने या आईपी एड्रेस को बदलकर इस तरह की सामग्री प्रसारित की जाती है।

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सख्त सजा देने की मांग

ये संसदीय स्थायी समिति सूचना और प्राद्योगिकी से संंबंधित है। इसकी अध्यक्षता बीजेपी सांसत नितिन अग्रवाल कर रहे हैं। इस समिति ने सूचना और प्रसारण मंत्रालय से आग्रह किया है कि जो लोग निरंतर अपराधी हैं उन्हें सख्त सजा देने के लिए कानून बनाया जाए। समिति का मानना है कि ओटीटी प्लेटफार्म पर अश्लीलता और पोर्न कंटेंट को रोकने के लिए मजबूत कानून होना चाहिए। ओटीटी प्लेटफार्म पर अश्लील और साफ्ट पोर्न कंटेंट से समाज पर भी असर पड़ रहा है। समिति की राय है कि समाज को ऐसे खराब कंटेंट से बचाने के लिए कानून लाना जरूरी है।

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अश्लील कंटेंट को लेकर हो चुके हैं कई विवाद

सूचना और प्रसारण मंत्रालय के लिए अनुदान की मांगों पर अपनी रिपोर्ट में समिति ने बताया कि मार्च पिछले साल उन्हें 18 ओटीटी प्लेटफार्मों के बारे में जानकारी मिली थी जो अश्लील और कभी-कभी पोर्नोग्राफिक सामग्री दिखा रहे थे। मंत्रालय ने पैनल को बताया कि इन प्लेटफार्मों से जुड़ी 19 वेबसाइटों, 10 ऐप्स (जिनमें से 7 गूगल प्ले पर और बाकी एप्पल ऐप स्टोर पर थे) और 57 सोशल मीडिया अकाउंट्स को सार्वजनिक रूप से बंद कर दिया गया था।

हाल के महीनों में ओटीटी प्लेटफार्म पर अश्लील सामग्री और सॉफ्ट पोर्न कंटेंट को लेकर कई विवाद भी हो चुके हैं। ये चिंताएं भी जाहिर की जा रही हैं कि ऐसी सामग्री का नकारात्मक प्रभाव बच्चों और युवाओं पर पड़ेगा।